पेट्रोल के बाद अब डीजल में भी होगा जैविक ईंधन का इस्तेमाल? गडकरी ने दी जानकारी

HIGHLIGHTS
- नितिन गडकरी ने एथेनॉल को किसानों के लिए फायदेमंद ईंधन विकल्प बताया।
- एथेनॉल का उत्पादन टूटे चावल, गन्ने, मक्का और बांस से किया जाता है।
- गन्ने के रस से एथेनॉल के साथ आइसोबिटोनॉल बनाने की संभावना भी बताई गई।
नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों पर अब लगभग विराम लग चुका है। वहीं, सरकार शत-प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को लेकर भी निर्णय कर चुकी है।
इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि भारत में डीजल में आइसोबिटोनॉल मिलाने का प्रयोग भी किया जा रहा है। हालांकि, इसकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। केपीएमजे के एक कार्यक्रम में उन्होंने वेस्ट टू वेल्थ के मंत्र को दोहराते हुए जैविक ईंधन के अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की।
नितिन गडकरी ने कहा कि एथेनॉल का उत्पादन टूटे चावल, गन्ने, मक्का और बांस से किया जाता है। उन्होंने इसे किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए भविष्य के ईंधन के तौर पर भी पेश किया। उनके मुताबिक, गन्ने के रस से एथेनॉल के साथ आइसोबिटोनॉल भी बनाया जा सकता है। देश में आइसोबिटोनॉल से चलने वाले इंजन भी बनने लगे हैं, ऐसे में यह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कारों को एथेनॉल से चलाया जा सकता है। इसके अलावा डीजल में 15 प्रतिशत आइसोबिटोनॉल मिलाने का प्रयोग भी किया जा रहा है। उन्होंने एविएशन बायो फ्यूल के सफल प्रयोगों का जिक्र करते हुए दावा किया कि अब दुनिया में एविएशन फ्यूल में भी दो प्रतिशत एथेनॉल मिलाने पर चर्चा शुरू हो गई है। इसके लिए 18 देशों में प्रयोग किए जा रहे हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड को बताया बड़ी समस्या
नितिन गडकरी ने कार्बन डाइऑक्साइड को एक बड़ी समस्या बताते हुए इसके समाधान के लिए वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि कार्बन डाइऑक्साइड में हाइड्रोजन मिलाकर यूरिया बनाया जा सकता है। इससे देश पर यूरिया आयात का साढ़े पांच से छह लाख करोड़ रुपये का बोझ कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए एनटीपीसी की ओर से टेंडर भी जारी किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कार्बन डाइऑक्साइड में हाइड्रोजन मिलाकर डाइमेथिल ईथर (डीएमई) का उत्पादन भी किया जा सकता है। उनके मुताबिक, यूएसए में एलपीजी में 40 प्रतिशत एलपीजी मिलाई जाती है। भारत में भी यह प्रयोग शुरू होने पर एलपीजी के आयात से राहत मिल सकती है।
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