PoK में तनाव के बीच लोगों ने भारतीय सेना से मांगी मदद, बोले- 'हमें पाकिस्तान के जुल्म से आजाद कराओ'

HIGHLIGHTS
- गुलाम जम्मू-कश्मीर में आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए, लोगों ने भारतीय सेना से मदद की अपील की।
- मुजफ्फराबाद मार्च के दौरान हिंसा के आरोप, 40 से अधिक लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने का दावा।
- मानवाधिकार संगठनों ने घटनाओं की स्वतंत्र जांच और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की।
श्रीनगर। गुलाम जम्मू-कश्मीर में जारी आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग पाकिस्तानी सेना और सरकार पर अत्याचार के आरोप लगाते हुए भारतीय सेना से मदद की अपील करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में लोग पाकिस्तान के जुल्म से आजादी दिलाने की मांग कर रहे हैं।
गुलाम जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को दबाने के लिए कार्रवाई किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चुनाव बहिष्कार के बाद निकाले गए मुजफ्फराबाद मार्च को रोकने के दौरान सुरक्षा बलों की फायरिंग में 40 से अधिक लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का दावा किया गया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी की कोर समिति के अध्यक्ष और प्रवक्ता उमर नजीर के भाई उस्मान नजीर की भी पाकिस्तानी रेंजरों की गोली से मौत होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा पाकिस्तानी वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के पिता की मौत का भी दावा किया गया है।
कुछ स्थानीय स्रोतों का आरोप है कि घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे चिकित्सा कर्मियों को धमकाया गया या उनके साथ मारपीट की गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में घायल लोगों को अस्पताल ले जाते हुए और रावलाकोट समेत आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन कर रही भीड़ दिखाई दे रही है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों और शिक्षाविदों की आवाज दबाने के लिए 13 स्कूल-कॉलेजों का पंजीकरण समाप्त करने का भी दावा किया गया है। वहीं, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात भी सामने आई है।
मुजफ्फराबाद मार्च को बताया निर्णायक
आंदोलन से जुड़े अमन खान ने समर्थकों से संघर्ष जारी रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन जनता के अधिकारों की लड़ाई है और मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहा मार्च इसे निर्णायक मोड़ तक पहुंचाएगा।
इस बीच, एक मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र人ाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) से हस्तक्षेप करने और घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। कई संगठनों ने हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।
परिजनों का पता नहीं लगा पा रहे लोग
अनंता इमरान नाम की एक युवती ने वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में हालात गंभीर हैं और कई परिवार अपने परिजनों का पता नहीं लगा पा रहे हैं। उसने मदद की अपील करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा कश्मीर के हक में आवाज उठाई है और अब सहायता की जरूरत है।
एक अन्य महिला, जिसकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है, वीडियो में रोते हुए अत्याचारों का जिक्र करती दिखाई दे रही है। उसने भारतीय सेना से मदद की अपील करते हुए क्षेत्र के लोगों को बचाने की मांग की।
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