आजमगढ़ हत्याकांड की 2019 से जुड़ी कड़ी, भाई की हत्या के बाद शुरू हुआ खूनी सिलसिला; आरोपी अरविंद ढेर

HIGHLIGHTS
- अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई वारदात
- आरोपी अरविंद ने पत्नी और दो पुजारियों की हत्या की
- गोली लगने से घायल नौ वर्षीय बेटे शौर्य की भी मौत हुई
- घटना के बाद आरोपी तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया था
- पुलिस ने करीब सात घंटे तक आरोपी को समझाने का प्रयास किया
आजमगढ़ में चार लोगों की हत्या और मुठभेड़ में मारे गए आरोपी अरविंद को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस पूरे खूनी घटनाक्रम की कड़ी वर्ष 2019 से जुड़ी बताई जा रही है। उस समय अरविंद के चचेरे भाई मनीष सिंह ने उसके सगे भाई सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मनीष को जेल भेजा गया था और वह करीब डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आया था।
मृत सुनील सिंह की पत्नी के भाई सूरज सिंह के मुताबिक, बबीता का मनीष सिंह के साथ प्रेम संबंध था। सुनील सिंह को इस संबंध की जानकारी हो गई थी। सुनील महाराष्ट्र में रहते थे और वह बाला साहब ठाकरे के जनसंपर्क अधिकारी थे। सूरज के अनुसार, सुनील ने अपने चचेरे भाई मनीष सिंह के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी सहित करीब 20 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
एक मामले में अदालत ने मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश को 20 साल की सजा सुनाई थी। दोनों वर्ष 2019 में जमानत पर जेल से बाहर आए थे और इसके बाद सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के मामले में दोनों को फिर जेल भेज दिया गया।
दोनों भाई करीब डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। इसके बाद परिवार के लोग परेशान रहते थे। सूरज सिंह ने बताया कि अरविंद सिंह की पत्नी बबीता और उसकी मां ने पुजारियों से बातचीत की थी। पुजारियों ने उन्हें बताया था कि सुनील सिंह की आत्मा उन्हें परेशान कर रही है। इसके बाद अरविंद की मां और पत्नी ने पुजारियों को पूजा-पाठ के लिए बुलाया।
सोमवार से पूजा चल रही थी। अरविंद ने पुजारियों को अगले दिन नहीं आने की चेतावनी दी थी, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मंगलवार को पूजा होते देखकर अरविंद भड़क गया। उसने गाली देते हुए पत्नी बबीता से कहा कि तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हो गई। अब तुम ड्रामा कर रही हो। इसके बाद उसने गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया।
मां और भतीजी घर से बाहर आ गए
घटना के दौरान मां और भतीजी घर से बाहर निकल आए। वहीं, एक पुजारी भी बचकर निकल गए। हालांकि, आरोपी की 10 साल की बेटी, 11 महीने की बेटी और 7 साल का बेटा घर के अंदर रह गए। आरोपी ने उन्हें बंधक बना लिया। मौके पर पहुंची पुलिस दरवाजा खुलवाने की कोशिश में जुटी रही।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस बार-बार लोगों को वहां से हटाती रही। आरोपी को समझाने के लिए घर के लोगों को भी बुलाया गया था, लेकिन उनकी अपील का भी उस पर असर नहीं हुआ। देर रात तक चले घटनाक्रम के कारण गांव में तनाव और भय का माहौल बना रहा।
एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक व्यक्ति द्वारा तीन लोगों को गोली मारने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। आरोपी ने खुद को बच्चों के साथ एक कमरे में बंद कर लिया था।
पुलिस ने करीब सात घंटे तक आरोपी को समझाने का प्रयास किया। इसी दौरान आरोपी ने अपने बेटे को गोली मार दी। इसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर कमरे के अंदर प्रवेश किया। पुलिस के अंदर पहुंचते ही आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं
दो जुलाई 2025 को जहानागंज थाना क्षेत्र के सरदार वल्लभ भाई पटेल नगर में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। उस घटना में आरोपी युवक नीरज पांडेय ने पिस्टल निकालकर सबसे पहले अपनी मां के पेट में गोली मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद नीरज ने बेटी के पेट और बेटे के कमर के निचले हिस्से में गोली मार दी। तीनों को गोली मारने के बाद उसने अपने सिर में भी फायर कर लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गोली की आवाज सुनकर जब पत्नी घर से बाहर आई तो सब कुछ खत्म हो चुका था।
16 अप्रैल 2023 को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के धंधारी गांव निवासी भानू प्रताप सिंह गांव के बाहर सड़क किनारे मकान बनाकर परिवार के साथ रहते थे। किसी बात को लेकर उन्होंने अपने पुत्र को डांट-फटकार लगाई थी। पिता की डांट से नाराज राजन ने अपने पिता भानू प्रताप सिंह (48), मां सुनीता देवी (45) और बहन राशि सिंह (13) की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी और फरार हो गया था।
पत्नी-बेटे और दो पुजारियों की हत्या, आरोपी ढेर
आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में पत्नी समेत तीन लोगों की हत्या के बाद तीन बच्चों को कमरे में बंधक बनाने वाले अरविंद कुमार ने पुलिस टीम पर भी गोलियां चला दीं। पुलिस करीब सात घंटे तक उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाती रही। इसी दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई।
बच्चों की जान बचाने के लिए एसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। पुलिस के अंदर पहुंचते ही आरोपी ने फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
खूनी घटनाक्रम की शुरुआत
आरोपी की गोली से घायल नौ वर्षीय बेटे शौर्य सिंह की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, पूरे खूनी घटनाक्रम की शुरुआत मंगलवार को भाई की आत्मा की शांति के लिए कराई जा रही पूजा के दौरान हुए विवाद से हुई। विवाद बढ़ने के बाद आरोपी अरविंद सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की हत्या कर दी। उसने पूजा के लिए आए दो पुजारियों को भी मार डाला। इसके बाद भी घटनाक्रम नहीं रुका।
सात घंटे तक चला मान-मनौव्वल और फिर गोलीबारी
तीन हत्या करने के बाद आरोपी अपने बच्चों के साथ घर के अंदर चला गया और एक कमरे में खुद को बंद कर लिया। कमरे में उसके तीन मासूम बच्चे भी मौजूद थे, जो इस पूरी स्थिति के गवाह बने। पुलिस करीब सात घंटे तक अरविंद से बातचीत करती रही। पुलिस का प्रयास था कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए और आरोपी आत्मसमर्पण कर दे।
कई घंटे की बातचीत के बाद अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पुलिस को आशंका हुई कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल ऑपरेशन शुरू किया। घर में प्रवेश के लिए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया और दरवाजा तोड़ा गया। पुलिस के अंदर पहुंचते ही आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी का एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार, टीम के अंदर दाखिल होते ही अरविंद सिंह ने गोलियां चला दीं। उसने लगातार चार-पांच राउंड फायर किए। आरोपी के पास छह राउंड की रिवॉल्वर थी और उसने सभी गोलियां चला दी थीं। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और तीन-चार राउंड फायरिंग हुई।
कुछ ही देर में आरोपी घायल हो गया। पुलिस अरविंद और उसकी गोली से घायल हुए उसके बेटे को अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टरों ने अरविंद को मृत घोषित कर दिया। वहीं, उसके बेटे की भी उपचार के दौरान मौत हो गई।
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