जुबीन गर्ग मौत मामले में दो आरोपियों को जमानत, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे वकील रतुल बोरा

HIGHLIGHTS
- जुबीन गर्ग की मौत के मामले में कुल सात आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल हैं।
- वकील रतुल बोरा ने पुलिस की चार्जशीट में खामियां होने का आरोप लगाया है।
- मामले की जांच के बाद दिसंबर में स्थानीय अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में दो आरोपियों को जमानत मिलने के बाद कानूनी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं। मामले में सबसे पहले पुलिस शिकायत दर्ज कराने वाले वकील रतुल बोरा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की चार्जशीट में खामियों के कारण आरोपियों को लगातार जमानत मिल रही है। बोरा ने मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
शनिवार को असम के मोरीगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रतुल बोरा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट से गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग करेंगे, जिसके तहत दो आरोपियों को जमानत दी गई है। उन्होंने शीर्ष अदालत से यह अपील करने की बात भी कही कि मामले के अन्य आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
जमानत पाने वालों में जुबीन गर्ग के बैंड की सदस्य और गायिका अमृतप्रभा महंत तथा उनके चचेरे भाई और निलंबित असम पुलिस उपाधीक्षक संदीपन गर्ग शामिल हैं।
जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती क्यों देंगे वकील?
रतुल बोरा का आरोप है कि पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में खामियां होने के कारण आरोपियों को अदालत से राहत मिल रही है। उन्होंने कानूनी कार्रवाई में राज्य सरकार की भूमिका पर भी असंतोष जताया।
बोरा ने स्पष्ट किया कि वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देंगे। साथ ही, वह मामले में जेल में बंद अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से रोकने की कोशिश करेंगे। ये आरोप उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए हैं।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के उनके फैसले के बाद मामले में आगे कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है।
जुबीन गर्ग की मौत के मामले में कौन-कौन हैं आरोपी?
अमृतप्रभा महंत और संदीपन गर्ग के अलावा इस मामले में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा, बैंड सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी और निजी सुरक्षा अधिकारी नंदेश्वर बोरा तथा प्रबीन बैश्य भी आरोपी हैं। इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से चार पर हत्या के आरोप हैं।
दोनों निजी सुरक्षा अधिकारियों को सितंबर में आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जमानत मिल चुकी थी। हालांकि, जुबीन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में वे अब भी जेल में हैं। इस प्रकरण की सुनवाई मोरीगांव की विशेष फास्ट ट्रैक सत्र अदालत में चल रही है।
जुबीन गर्ग की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई थी?
जुबीन गर्ग की मौत 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए सिंगापुर गए थे।
उनकी मौत के बाद असम में 60 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं। इसके बाद असम पुलिस के अपराध जांच विभाग के तहत गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच की। एसआईटी ने दिसंबर में स्थानीय अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया।
असम सरकार का कहना है कि सिंगापुर पुलिस की जांच के निष्कर्ष यहां चल रहे मामले को प्रभावित नहीं करेंगे।
सिंगापुर पुलिस की जांच में क्या सामने आया था?
जुबीन गर्ग की मौत की जांच सिंगापुर पुलिस ने भी अलग से की थी। उसकी जांच में किसी साजिश या गलत काम के सबूत नहीं मिलने की बात कही गई थी।
सिंगापुर की एक अदालत ने भी कहा था कि गायक ने बहुत अधिक नशा कर रखा था और लाइफ जैकेट पहनने से इनकार करने के बाद लाजरस द्वीप के पास समुद्र में डूब गए थे। हालांकि, असम में इस मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य विधानसभा में जुबीन गर्ग की मौत को ‘सीधी और स्पष्ट हत्या’ बताया था। इस तरह सिंगापुर की जांच के निष्कर्ष और असम में लगाए गए आरोप अलग-अलग हैं।
अब दो आरोपियों को जमानत मिलने के बाद शिकायतकर्ता वकील रतुल बोरा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है।
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