ब्रिटेन को मिला नया PM, लेबर नेता एंडी बर्नहैम ने संभाली प्रधानमंत्री पद की कमान

HIGHLIGHTS
- एंडी बर्नहैम ने कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।
- बर्नहैम के सामने रिफॉर्म यूके के बढ़ते प्रभाव को रोकने और महंगाई व कमजोर सार्वजनिक सेवाओं जैसी चुनौतियों से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी है।
- नए प्रधानमंत्री के लिए मंत्रिमंडल का गठन पहली बड़ी चुनौती होगी, खासकर वित्त मंत्री के पद पर सबकी नजर रहेगी।
ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नए नेता चुने गए एंडी बर्नहैम ने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ के नाम से पहचाने जाने वाले एंडी बर्नहैम, कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे थे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकलुभावन पार्टी रिफॉर्म यूके के बढ़ते प्रभाव को रोकने की होगी। ब्रिटेन में राजनीतिक बदलाव के बीच पिछले दस वर्षों में देश को अपना सातवां प्रधानमंत्री मिला है।
लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहैम को पिछले हफ्ते शुक्रवार को पार्टी का नया प्रमुख चुना गया था। लेबर पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी (NEC) की चेयर शबाना महमूद ने लंदन में आयोजित पार्टी के विशेष सम्मेलन में इसकी घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि केवल एक सांसद का नामांकन हुआ था, इसलिए चुनावी मुकाबला आसान रहा।
बर्नहैम ने लेबर पार्टी का नेता चुने जाने को पिछले 40 वर्षों में देश की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव बताया था।
बर्नहैम ने जनता से किए कई वादे
एंडी बर्नहैम ने देश की व्यवस्था में बदलाव करने और सरकार का ध्यान महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और कमजोर होती सार्वजनिक सेवाओं जैसे आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित करने का संकल्प लिया है।
कीर स्टार्मर द्वारा राजा को औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपने के बाद किंग चार्ल्स तृतीय ने एंडी बर्नहैम को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। इससे पहले स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपना विदाई संबोधन दिया और इसके बाद किंग चार्ल्स से मुलाकात की।
56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहते हुए ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ के नाम से प्रसिद्ध हुए थे। अब उनके सामने संकट से जूझ रही सार्वजनिक उपयोगिता कंपनियों और कमजोर आर्थिक विकास जैसी पुरानी चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी होगी।
रिफॉर्म यूके की चुनौती से निपटना बड़ी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में एंडी बर्नहैम "अधिक स्थिर और जिम्मेदार राजनीति" की रूपरेखा पेश करेंगे। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह आत्ममंथन का समय है और देश की समस्याओं को ईमानदारी से स्वीकार करने की जरूरत है।
बर्नहैम का कहना है कि राजनीतिक स्थिरता के जरिए ही लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की बात कही, ताकि लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके और देश में जीवन अधिक किफायती बनाया जा सके।
लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि एंडी बर्नहैम ही उन नेताओं में शामिल हैं, जो निगेल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी की बढ़ती चुनौती का सामना कर सकते हैं। उनका मानना था कि कीर स्टार्मर इस चुनौती से निपटने में सफल नहीं हो पा रहे थे।
मंत्रिमंडल का गठन बर्नहैम के लिए पहली बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री बनने के बाद एंडी बर्नहैम के सामने सबसे पहली बड़ी चुनौती मंत्रिमंडल का गठन होगी। खास तौर पर वित्त मंत्री के पद पर किसे नियुक्त किया जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
पहले भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेद कई सरकारों के लिए संकट का कारण बन चुके हैं। ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो मंत्री एड मिलिबैंड को इस पद का शुरुआती दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उनके नाम को लेकर आलोचनाएं भी सामने आई हैं। अब गृह मंत्री शबाना महमूद को वित्त मंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
हालांकि, एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को पार्टी नेताओं से अपील की कि वे मंत्रिमंडल को लेकर चल रही अटकलों को नजरअंदाज करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी टीम को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।
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