आठ साल पुराने दहेज हत्या केस में कोर्ट का सख्त फैसला, पति को सुनाई फांसी की सजा

HIGHLIGHTS
- सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
- आरोपी नदीम को 26 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था।
- पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
मुजफ्फरनगर के शाहपुर में करीब आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दीवाकर ने आरोपी पति नदीम पुत्र सलीम को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
फैसले में अदालत ने अपराध की गंभीरता और क्रूरता पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मामले में क्रूरता की हद पार करते हुए जघन्य अपराध किया गया। अदालत के अनुसार, ऐसी परिस्थिति में मृत्युदंड से कम सजा देना न्यायहित में पर्याप्त नहीं होगा।
2018 में मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का आरोप
यह मामला वर्ष 2018 का है। पुलिस के मुताबिक, 23 जुलाई 2018 को बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद पुत्र असलुफ ने शाहपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी को दहेज के लिए ससुराल में प्रताड़ित किया जाता था और उसके साथ मारपीट की गई थी।
शिकायत के अनुसार, इसके बाद विवाहिता पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई। इस घटना में वह करीब 98 प्रतिशत झुलस गई थी।
सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
गंभीर रूप से झुलसी विवाहिता को उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद शाहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपी नदीम के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 304बी, 302 और 504 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
26 अगस्त 2018 को हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी नदीम को 26 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 23 नवंबर 2018 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद यह मामला करीब आठ साल तक अदालत में चला।
कोर्ट ने कहा- मृत्युदंड से कम सजा पर्याप्त नहीं
7 सितंबर 2026 को अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश रवि कुमार दीवाकर ने आरोपी पति नदीम को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
फैसले के दौरान अदालत ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया, वह क्रूरता की सीमा पार करने वाला जघन्य अपराध है। ऐसी स्थिति में मृत्युदंड से कम सजा देना न्यायहित में पर्याप्त नहीं होगा।
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