फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सख्ती, 2400 से अधिक गिरफ्तार; कई देशों में आंदोलन तेज

HIGHLIGHTS
- प्रधानमंत्री ने जरूरत के अनुसार चुनिंदा इलाकों में कर्फ्यू लगाने के निर्देश दिए हैं।
- गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया।
- सरकार ने खुफिया जानकारी जुटाने और हिंसा का पूर्वानुमान लगाने में हुई चूक की जांच शुरू की है।
फ्रांस में महंगाई, बढ़ते खर्च और स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद सरकार ने सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। रायटर्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने स्थानीय प्रशासन को जरूरत पड़ने पर चुनिंदा इलाकों में कर्फ्यू लगाने का निर्देश दिया है।
प्रधानमंत्री ने देश में आपातकाल लागू करने की संभावना को भी खारिज नहीं किया है। इस बीच, विभिन्न यूनियनों ने पांच नवंबर को राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया है।
यूरोपीय सरकारों ने फ्रांस समेत छह देशों की यात्रा को लेकर सलाह जारी की है और नागरिकों को भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहने को कहा है। फ्रांस में सुरक्षा के लिए करीब 60 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। हिंसा से जुड़े मामलों में 2400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि लगभग एक हजार पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
कई शहरों के मेयरों ने पुलिस की कमजोर कार्रवाई पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हालात देखकर ऐसा नहीं लगा कि देश में पुलिस व्यवस्था मौजूद है।
फ्रांसीसी अखबार ली मोंड के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिंसक प्रदर्शनों के लिए अवैध अप्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया है।
गृह मंत्री ने सुरक्षा में चूक की बात स्वीकार की
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा पर नियंत्रण पाने में नाकामी के बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे मंजूर नहीं किया। इंटर रेडियो से बातचीत में नुनेज ने कहा कि देश में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी उनकी है।
गृह मंत्री ने हिंसा के लिए उपद्रवियों, लूटपाट करने वाली भीड़ और कट्टर वामपंथी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया। वहीं, मैक्रों ने उन्हें पद पर बने रहने और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों की जांच कर नई रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया।
नुनेज ने स्वीकार किया कि कुछ बड़े शहरों में पुलिस हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रही। सरकार ने खुफिया जानकारी जुटाने और हिंसा का पूर्वानुमान लगाने में हुई चूक की भी जांच शुरू कर दी है।
आंदोलन को और तेज करने की तैयारी
सरकार ने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और लूटपाट करने वालों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और महंगाई से राहत शामिल है। विपक्ष ने सरकार की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
इस बीच, छात्र संगठनों और श्रमिक यूनियनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। देश में बढ़ते बजट घाटे और संसद में राजनीतिक गतिरोध के बीच यह संकट राष्ट्रपति मैक्रों की सरकार के लिए एक नई चुनौती बन गया है।
यूरोप के दूसरे देशों में भी विरोध और हिंसा
स्पेन: आवास संकट के खिलाफ 50 शहरों में प्रदर्शन
स्पेन में आवास संकट को लेकर 50 शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मैड्रिड में बारिश के बावजूद करीब 70 हजार लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी के सोल चौक पर प्रदर्शनकारी तीन सप्ताह से टेंट लगाकर डटे हुए हैं। उनकी मांगों में बेदखली रोकना, किराये पर नियंत्रण और सस्ते सरकारी आवास उपलब्ध कराना शामिल है।
ग्रीस: हॉस्टल की कमी से परेशान छात्र
ग्रीस में हॉस्टल की भारी कमी के विरोध में छात्रों ने संसद के सामने दर्जनों टेंट लगाकर प्रदर्शन किया। वित्त मंत्रालय के बाहर भी रैली निकाली गई। छात्रों का दावा है कि देश में 96 प्रतिशत विद्यार्थियों को हॉस्टल नहीं मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले 10 वर्षों में कमरों का किराया तीन गुना बढ़ गया है।
इटली: छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा किया
फ्रांस के प्रदर्शनों से प्रेरित होकर इटली के छात्रों ने रोम, ट्यूरिन समेत कई शहरों में स्कूलों पर कब्जा कर लिया। छात्र संगठनों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है।
अल्बानिया: महंगी शिक्षा और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन
अल्बानिया में शिक्षा की बढ़ती लागत और बेरोजगारी के विरोध में छात्रों का आंदोलन हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और रोजगार के सीमित अवसर लोगों की नाराजगी की वजह बने हुए हैं। देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
बेल्जियम: शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ मार्च
बेल्जियम में शिक्षा बजट में कटौती के विरोध में छात्रों और शिक्षकों ने मार्च निकाला। राजधानी ब्रसल्स में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई और उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की। देश में 17 नवंबर को एक और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी है।
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