दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की होगी जांच, बारिश से नुकसान के बाद NHAI ने गठित की SIT

HIGHLIGHTS
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बारिश से हुए नुकसान के बाद NHAI ने निर्माण गुणवत्ता की जांच के लिए SIT गठित की है।
- टीम एक्सप्रेसवे के 23 स्थानों से सैंपल लेकर सड़क की मजबूती और निर्माण सामग्री की जांच करेगी।
- जांच में खामियां मिलने पर मरम्मत के साथ जिम्मेदार ठेकेदार और एजेंसियों पर कार्रवाई की जाएगी।
बागपत। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सामने आई खामियों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कदम उठाया है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने, मिट्टी कटने और गड्ढे बनने की शिकायतों के बाद निर्माण गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।
SIT की टीम दिल्ली से देहरादून तक एक्सप्रेसवे के 23 चिन्हित स्थानों पर कोर कटिंग कर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करेगी। प्रत्येक स्थान से दो से तीन सैंपल लिए जाएंगे। जांच की शुरुआत शुक्रवार शाम बागपत के मवीकलां क्षेत्र से कर दी गई है।
बारिश के बाद सामने आईं कई खामियां
करीब 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून तक बने एक्सप्रेसवे पर पहली ही तेज बारिश में कुछ हिस्सों में नुकसान देखने को मिला था।
शामली जिले में सड़क धंसने के कारण कई वाहन प्रभावित हुए थे। इसके बाद NHAI ने कार्रवाई करते हुए निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेंद्र कुमार और कंसल्टेंसी एजेंसी के टीम लीडर कुलदीप राजदान को जिम्मेदारियों से हटा दिया था। वहीं कुछ अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
इसके अलावा बागपत के गांगनौली-नांगल गांव के बीच एक्सप्रेसवे किनारे मिट्टी कटने से गड्ढा बन गया था और रेलिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। सहारनपुर क्षेत्र में भी कई जगह मिट्टी कटान की शिकायतें सामने आई थीं।
तकनीकी विशेषज्ञ करेंगे पूरे एक्सप्रेसवे का ऑडिट
NHAI के बागपत कार्यालय के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह के अनुसार, जांच दल में स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी, NHAI के अभियंता, एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता और प्राधिकरण के तकनीकी अधिकारी शामिल किए गए हैं।
टीम एक्सप्रेसवे का विस्तृत तकनीकी ऑडिट करेगी। सड़क की अलग-अलग परतों की जांच के साथ निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता भी परखी जाएगी।
जांच के दौरान सड़क की तीनों लेन से सैंपल लेकर उनकी मजबूती और मानकों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अन्य तकनीकी परीक्षण भी कराए जा सकते हैं।
रात में होगी जांच, जरूरत पर बदलेगा ट्रैफिक रूट
वाहनों की आवाजाही को देखते हुए SIT के अधिकारी एक्सप्रेसवे पर अधिकतर तकनीकी जांच रात के समय करेंगे। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने की संभावना है।
यदि जांच के दौरान किसी हिस्से में बड़ी कमी सामने आती है तो वहां मरम्मत कार्य के लिए कुछ समय के लिए रूट डायवर्जन किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, यह डायवर्जन छह घंटे से अधिक का नहीं होगा और इसकी जानकारी पहले से जारी की जाएगी।
NHAI अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि कोई खामी मिलती है तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा और जिम्मेदार ठेकेदार या संबंधित एजेंसी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।























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