नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से तबाही, जलविद्युत सुरंग में फंसे लोगों के रेस्क्यू में जुटी टीम

HIGHLIGHTS
- करीब 90 सदस्यों की संयुक्त टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी
- रविवार को बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंचा
- सुरंग में करीब 2×3 फीट का रास्ता बनाया गया
नेपाल। बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार चल रहा है। इस समय सबसे बड़ी चुनौती ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे कर्मचारियों और इंजीनियरों को बाहर निकालना है। बचाव दल सुरंग तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग, खुदाई और नियंत्रित विस्फोट का सहारा ले रहे हैं। नेपाली सेना के अनुसार, रविवार को बचाव दल सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचने में सफल रहा।
इस अभियान में करीब 90 सदस्यों की संयुक्त टीम लगी हुई है। इसमें 66 नेपाली सेना के जवान, प्रशिक्षित कुत्तों के साथ विशेषज्ञ खोज एवं बचाव दल, 18 सशस्त्र पुलिस बल के जवान और छह नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।
सुरंग में बनाया गया छोटा रास्ता
रविवार दोपहर करीब दो बजे बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से यानी ‘क्राउन हेड’ तक पहुंचा। वहां करीब 2×3 फीट का रास्ता बनाया गया। इसके बाद बचावकर्मी रस्सियों के सहारे सुरंग के अंदर उतरे और वहां मौजूद लोगों को आवाज लगाई। हालांकि, अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद बचाव दल ने सुरंग के रास्ते को और चौड़ा करने का काम तेज कर दिया। भारी मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की मदद से अंदर तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सुरंग में प्रवेश का रास्ता पूरी तरह खुलने के बाद अंदर फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का अभियान तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
सुरंग में ऑक्सीजन और खाना भेजा गया
बचाव दल ने सुरंग के भीतर हवा और ऑक्सीजन पहुंचाना शुरू कर दिया है। एक ऊर्ध्वाधर रास्ते के जरिए पहले ही ऑक्सीजन अंदर भेजी जा चुकी है। अंदर की स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरा भी भेजा गया है।
बचाव दल अंदर फंसे लोगों से संपर्क करने और उनकी स्थिति जानने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक किसी से संपर्क नहीं हो सका है। मलबे से भरी जलविद्युत परियोजना की सुरंगों तक पहुंचने के लिए लगातार खुदाई की जा रही है। अंदर फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद में हवा और खाने का सामान भी पहुंचाया गया है। इसके बावजूद अभी तक किसी व्यक्ति से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। बचाव अभियान जारी है।
नेपाल में 900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता
नेपाल की अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 900 से अधिक कर्मचारी इस आपदा के बाद लापता बताए जा रहे हैं। इनमें से कई के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल के सामने भारी मलबा, तेज नदी का बहाव और खराब मौसम जैसी चुनौतियां हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद सुरंगों तक पहुंचने का प्रयास जारी है।
हेलीकॉप्टर से सुरंग तक पहुंचाई गईं भारी मशीनें
बाढ़ के कारण जलविद्युत परियोजना तक जाने वाली सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते भारी मशीनों को घटनास्थल तक ले जाना मुश्किल हो गया। इसके बाद नेपाली सेना ने खुदाई करने वाली मशीनों और बुलडोजरों को अलग-अलग हिस्सों में खोला।
इन मशीनों को हेलीकॉप्टर के जरिए नुवाकोट के बट्टार तक पहुंचाया गया और वहां से परियोजना स्थल तक ले जाया गया। मशीनों की मदद से सुरंग का रास्ता खोलने और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।
रात की बारिश और नदी का बढ़ा पानी बना बाधा
बचाव अभियान में मौसम और नदी का बढ़ता जलस्तर लगातार चुनौती बने हुए हैं। शनिवार रात हुई बारिश और नदी का पानी बढ़ने के कारण सुरंग के पास खुदाई वाली जगह में पानी भर गया था। इसके चलते अभियान कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।
बाद में बाढ़ का पानी कम होने पर बचाव दल ने दोबारा ड्रिलिंग मशीन, एक्सकेवेटर, हाइड्रोलिक कटर और अन्य उपकरणों के जरिए सुरंग के प्रवेश द्वार की तलाश शुरू की। सेना के अधिकारियों के मुताबिक, नदी के तेज बहाव और मुश्किल हालात के बावजूद संयुक्त बचाव दल लगातार काम कर रहा है।
नेपाल में 752 लोगों की मौत, 2500 से ज्यादा लापता
इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 752 हो गई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, करीब 2,502 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अब तक लगभग 8,730 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, लापता लोगों में 933 जलविद्युत कर्मचारी भी शामिल हैं।
कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?
बुधवार को हिमालय में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इससे बड़ी मात्रा में चट्टान और मलबा जमा हुआ, जो तेज बहाव के साथ लेंदे नदी में जा गिरा। इसके बाद पानी और मलबे का तेज सैलाब नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों की ओर बढ़ा और कई इलाकों में भारी तबाही हुई।
त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट में करीब 9 मीटर तक बढ़ गया। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसे भूकंप से जोड़ने की बात कही थी, लेकिन बाद की जांच में पाया गया कि दर्ज किया गया भूकंपीय संकेत खुद भूस्खलन की वजह से उत्पन्न हुआ था।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी भारी नुकसान
इस आपदा का असर नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी पड़ा है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, वहां कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
चीन के मुताबिक, लापता विदेशी नागरिकों में 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।
भारत समेत कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सहायता की पेशकश की है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस समेत कई संस्थाएं राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
अमेरिका और कनाडा ने 3.6-3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने करीब 6.8 मिलियन डॉलर, संयुक्त राष्ट्र ने 2.5 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ ने करीब 2.3 मिलियन डॉलर की सहायता का एलान किया है।
नेपाल सरकार ने बचाव अभियान के लिए विशेषज्ञ मदद के वास्ते भारत और चीन से भी सहयोग मांगा है। फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
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