ज्ञानेश कुमार पर जीजी थॉमसन का दावा, भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का दिया था प्रस्ताव

HIGHLIGHTS
- जीजी थॉमसन ने अपने दावे को लेकर घटनाक्रम बताया।
- थॉमसन के मुताबिक, उस समय वह केरल के मुख्य सचिव थे।
- उन्होंने एक फ्लाइट में हुई बातचीत का जिक्र किया।
केरलम के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि जब ज्ञानेश कुमार आईएएस अधिकारी थे, तब उन्होंने उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था।
जीजी थॉमसन ने आरोप लगाया कि उनसे पूछा गया था कि क्या वह 2019 का लोकसभा चुनाव केरल की पथानामथिट्टा सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लड़ने में रुचि रखते हैं।
थॉमसन ने क्या कहा?
स्थानीय अखबार के मुताबिक, जीजी थॉमसन ने बताया, "उस समय मैं केरल का मुख्य सचिव था। हम एक ही फ्लाइट में साथ यात्रा कर रहे थे। वे प्रधानमंत्री मोदी की बहुत तारीफ कर रहे थे और उन्होंने मुझसे साफ-साफ पूछा कि क्या मैं 2019 के आम चुनावों में पथानामथिट्टा से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने में दिलचस्पी रखता हूं। वे मुझे मनाने की बहुत कोशिश कर रहे थे लेकिन मैंने तुरंत मना कर दिया।"
2019 में पथानामथिट्टा लोकसभा सीट से कांग्रेस के एंटो एंटनी ने जीत दर्ज की थी, जबकि सीपीआई (एम) की वीना जॉर्ज दूसरे स्थान पर रही थीं। भाजपा ने इस सीट से के. सुरेंद्रन को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें 28.95 प्रतिशत वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
थॉमसन ने अपने करियर के शुरुआती दौर की एक अन्य घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया, "हालांकि मैंने उस समय भी इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, लेकिन ज्ञानेश को इसके बारे में पता चल गया और उन्होंने मुझे राजनीति में आने के लिए मनाने की कोशिश की।"
राहुल गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी मिलने से पहले वह भाजपा के लिए लोगों को राजनीति में लाने के काम में शामिल थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "ज्ञानेश कुमार उस समय एक कार्यरत आईएएस अधिकारी थे और उनका इस्तेमाल बीजेपी के लिए भर्ती करने में किया गया था।"
विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन की बात कही गई है।
यह मामला उस समय और चर्चा में आया, जब एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों को लेकर कई बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से था। इनमें फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया और वोटर डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।
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