हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के खिलाफ बड़ा कदम, नौसैनिक नाकेबंदी का किया ऐलान

HIGHLIGHTS
- यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ तत्काल प्रभाव से नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने का ऐलान किया है।
- हूती संगठन ने सऊदी अरब पर प्रतिबंध लगाने और उनके क्षेत्रों में कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए इसे जवाबी कदम बताया है।
- हालिया मिसाइल हमलों और नाकेबंदी की घोषणा के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए तत्काल प्रभाव से नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की है। रॉयटर्स के अनुसार, संगठन के सैन्य प्रवक्ता ने टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा कि अब सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध लागू रहेगा। हूती विद्रोहियों ने इस कदम को 'आंख के बदले आंख' की नीति के तहत उठाया गया फैसला बताया है।
इस घोषणा के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हूती विद्रोहियों ने क्यों उठाया यह कदम?
हूती विद्रोहियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर जमीन, समुद्र और हवाई मार्ग से व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। संगठन का कहना है कि इस दौरान उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों को लंबे समय तक प्रभावित किया गया और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने का फैसला किया है।
क्या हाल में दोनों पक्षों के बीच बढ़ा है तनाव?
पिछले सप्ताह हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल हमले किए थे। संगठन ने दावा किया था कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले एक हवाई अड्डे पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई।
इन मिसाइल हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ वर्षों से बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति में फिर से तनाव पैदा हो गया है।
चार साल के युद्धविराम पर पड़ सकता है असर
मार्च 2022 में अनौपचारिक युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहला अवसर है जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है।
इससे पहले भी हूती संगठन सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना चुका है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष में कुछ समय के लिए कमी आई थी। अब नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा और हालिया मिसाइल हमलों के बाद आशंका जताई जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है।
यदि स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो इसका असर पश्चिम एशिया की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
























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