पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव पर भारत का पलटवार, कहा- अवैध कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश

HIGHLIGHTS
- भारत ने पीओजेके में कराए जा रहे तथाकथित चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश बताया।
- विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओजेके में विरोध प्रदर्शन आर्थिक शोषण और अधिकारों के हनन का परिणाम हैं।
- भारत-चीन संबंधों को लेकर विदेश सचिव की चीन यात्रा और सीमा व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इन चुनावों से जुड़ी खबरों को देखा है और यह पूरी प्रक्रिया पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाने का प्रयास है।
रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरें देखी हैं। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जो इस समय पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे में हैं, भारत के अभिन्न अंग हैं।"
पाकिस्तान पर विदेश मंत्रालय का निशाना
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रही यह चुनावी प्रक्रिया केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे को छिपाने और वहां मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों को ढकने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं।
भारत-चीन सीमा व्यापार पर भी बयान
रणधीर जायसवाल ने भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में दोनों देशों ने तीन निर्धारित व्यापारिक मार्गों- लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथू ला दर्रे के जरिए सीमा व्यापार दोबारा शुरू करने पर सहमति जताई थी।
उन्होंने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 27 से 28 जुलाई तक चीन की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान उन्होंने बीजिंग में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान से मुलाकात की।
चीन के साथ संबंधों पर चर्चा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बैठकों में दोनों नेताओं के दिशा-निर्देशों के तहत द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके बाद विदेश सचिव ने चीन की विदेश मामलों की उप मंत्री हुआ चुनयिंग से भी मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक संबंधों, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने सहित कई क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर विचार किया। साथ ही भारत और चीन के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। विदेश सचिव ने चीनी जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव हांग लियांग से भी मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने राष्ट्रीय अकादमी, केंद्रीय पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष ली वेंटांग से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने उन क्षेत्रों और संभावित अवसरों पर चर्चा की, जहां भारत और चीन मिलकर सहयोग कर सकते हैं।
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