भारत-अमेरिका व्यापार समझौता ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’, विपक्ष की दलीलें बेअसर: श्रृंगला

HIGHLIGHTS
- भाजपा सांसद और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों के रिश्तों के लिए मील का पत्थर बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है।
- उन्होंने कहा कि इस करार ने आलोचकों की दलीलों को कमजोर कर दिया है और अब उनके पास विरोध के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचा है।
- श्रृंगला के अनुसार इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को घटाकर करीब 18 प्रतिशत करने जा रहा है।
- उन्होंने बताया कि यह दर चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कम ह…
भाजपा सांसद और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों के रिश्तों के लिए मील का पत्थर बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस करार ने आलोचकों की दलीलों को कमजोर कर दिया है और अब उनके पास विरोध के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचा है।
श्रृंगला के अनुसार इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को घटाकर करीब 18 प्रतिशत करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह दर चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कम होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
ट्रंप-मोदी बातचीत के बाद बनी सहमति
पूर्व राजदूत ने कहा कि इस व्यापार समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद की थी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है और अब अधिकारी इसके तकनीकी पहलुओं और शर्तों को अंतिम रूप देंगे।
कांग्रेस की उस आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने किसानों के हितों से समझौता किया है, श्रृंगला ने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ते देखना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि यह करार किसानों, उद्योगों और श्रमिकों—सभी के लिए नए अवसर लेकर आएगा।
निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार
श्रृंगला के मुताबिक 18 प्रतिशत का शुल्क स्तर भारत के लिए अहम है, क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की पहुंच आसान होगी और निर्यात में तेजी आएगी। उन्होंने दोहराया कि जब भारत-यूरोपीय संघ के समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा गया है, तो भारत-अमेरिका करार को ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ कहना बिल्कुल उचित है।
वित्त मंत्रालय का भी समर्थन
वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार इससे श्रम-प्रधान और विनिर्माण क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में नए अवसर मिलेंगे, साथ ही उन्नत तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग भी बढ़ेगा।
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