आतंकवाद पर भारत का सख्त संदेश, जयशंकर ने रूबियो से कहा- ‘जीरो टॉलरेंस’ जरूरी

HIGHLIGHTS
- मुंबई में ‘फ्रीडम-250’ समारोह के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भारत-अमेरिका संबंधों पर विचार साझा किए।
- द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई।
- रूबियो और जयशंकर ने ताज होटल में मुंबई आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।
नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्कों के बीच भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से कहा कि भारत अपने साझेदार देशों से आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की उम्मीद करता है।
जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित ‘फ्रीडम-250’ समारोह में यह बात कही। उनके संदेश में स्पष्ट था कि भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता आवश्यक है।
हालांकि, इस संदेश से दोनों देशों के बीच बातचीत में किसी तरह के तनाव का संकेत नहीं मिला। दोनों पक्षों ने वार्ता को सकारात्मक बताया। रूबियो ने दिन में जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी अपने विचार साझा किए।
बैठक से पहले रूबियो और जयशंकर ने ताज होटल में मुंबई आतंकी हमले में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में बने स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान दोनों देशों की ओर से आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प का संदेश दिया गया।
‘फ्रीडम-250’ समारोह को संबोधित करते हुए रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी की दिशा निर्धारित करने वाला महत्वपूर्ण रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश सुरक्षित और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ मुक्त व्यापार के महत्व को समझते हैं। उन्होंने भारत को एक शक्तिशाली और प्रभावशाली देश बताते हुए दोनों देशों के साझा हितों और मूल्यों पर जोर दिया।
जयशंकर ने कहा कि विश्व व्यवस्था में बदलाव हो रहा है और विभिन्न देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत के विकास में योगदान दिया है, वहीं भारतीय प्रतिभा और कौशल ने अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका के बीच कुछ जटिल मुद्दे रहे हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ दशकों में दोनों देशों की साझेदारी का दायरा बढ़ा है। रक्षा, ऊर्जा और नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग इसका उदाहरण है।
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