सीजेपी आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर इलाके में इंटरनेट सेवा बहाल, मेट्रो सेवाएं सामान्य

HIGHLIGHTS
- सीजेपी द्वारा आंदोलन वापस लेने के बाद जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के इलाकों में इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई।
- दिल्ली मेट्रो ने सभी स्टेशनों के प्रवेश द्वार खोल दिए और यात्री सेवाएं फिर से सामान्य हो गईं।
- सरकार से मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने एक महीने से अधिक समय से चल रहा प्रदर्शन समाप्त किया।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आंदोलन समाप्त करने के बाद जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया।
वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सभी मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य यात्री सेवाएं बहाल कर दी हैं। डीएमआरसी ने जानकारी दी कि दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों के प्रवेश द्वार अब खोल दिए गए हैं।
18 मेट्रो स्टेशनों को किया गया था बंद
नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कई दिनों तक क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवा के लिए जैमर का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते मध्य दिल्ली के 18 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया गया था।
इन स्टेशनों में राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, आईटीओ और नई दिल्ली जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने भीड़ और यातायात जाम की स्थिति को देखते हुए लोगों को नई दिल्ली क्षेत्र की ओर जाने से बचने की सलाह दी थी।
पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की थी, ताकि उन्हें देरी और परेशानी का सामना न करना पड़े।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार से सहमति बनने और तय समय सीमा में मांगों को पूरा करने के आश्वासन के बाद संगठन ने सद्भावना के तहत आंदोलन वापस लिया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था इस्तीफा
एक महीने से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। यह आंदोलन मुख्य रूप से जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में चलाया गया था। इसमें कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की 26 दिन लंबी भूख हड़ताल भी शामिल रही।
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा था। उन्होंने कहा था कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा न किया जाए।
सीजेपी की प्रमुख मांगें
सीजेपी ने बताया कि केंद्र सरकार नीट अभ्यर्थियों के उन परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सहमत हुई है, जिनके बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा सरकार ने देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने का आश्वासन भी दिया है।
मांगों पर सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया।
सरकार ने मांगों पर विचार का दिया भरोसा
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने शिक्षा परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ी मांगों पर विचार किया है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन से जुड़े अन्य मुद्दों को भी स्वीकार किया गया है।
नड्डा ने कहा कि सरकार सीजेपी के परीक्षा सुधारों से जुड़े पांच सूत्रीय चार्टर की समीक्षा करेगी और चर्चा के बाद जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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