अमेरिका से बढ़े तनाव के बीच ईरान ने इस्लामाबाद समझौते की सभी शर्तें निलंबित कीं

HIGHLIGHTS
- ईरान ने अमेरिका पर इस्लामाबाद समझौते की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं निलंबित कर दी हैं।
- आईआरजीसी ने अमेरिका के जवाबी हमलों के बाद और कार्रवाई की चेतावनी दी, साथ ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले खाड़ी देशों को भी चेताया है।
- पाकिस्तान और कुवैत ने अमेरिका-ईरान से तनाव कम करने और पिछले समझौते का सम्मान करने की अपील की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब और गहरा गया है। ईरान ने शनिवार को अमेरिका की ओर से किए जा रहे लगातार सैन्य हमलों के बाद इस्लामाबाद समझौते की सभी शर्तों को निलंबित करने का फैसला लिया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया है, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने भी समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों और इसके क्रियान्वयन को फिलहाल रोक दिया है, क्योंकि इस समय देश अपनी रक्षा में व्यस्त है।
वहीं, पाकिस्तान और कुवैत ने दोनों देशों से पिछले महीने हुए समझौते का सम्मान करने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
आईआरजीसी ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने अपने बयान में कुरान का हवाला देते हुए कहा कि ईरान पर हमला करने वालों को उसी तरह जवाब दिया जाएगा।
आईआरजीसी ने उन खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है, जहां अमेरिकी सैन्य बल मौजूद हैं। संगठन ने कहा कि अगर किसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले के लिए किया गया, तो उसे भी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है।
पाकिस्तान और कुवैत ने की संयम बरतने की अपील
पाकिस्तान और कुवैत ने शनिवार को अमेरिका और ईरान से पिछले महीने हुए समझौता ज्ञापन का पालन करने और तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने की अपील की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह अपील पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान की गई।
दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। यह बातचीत उस समय हुई, जब अमेरिका और ईरान ने शनिवार को एक-दूसरे पर नए हमले किए। इन हमलों में सैन्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
कुवैत के विदेश मंत्री ने अपने देश पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई और उम्मीद व्यक्त की कि सभी पक्ष संयम बरतेंगे तथा समझौता ज्ञापन को पूरी तरह लागू करेंगे।
ईरानी हमलों से कुवैत में नुकसान
हालिया संघर्ष से प्रभावित देशों में कुवैत भी शामिल है। कुवैती अधिकारियों के अनुसार, ईरानी हमलों में एक समुद्री जल शोधन संयंत्र और एक तेल प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते कुछ समय के लिए कुवैत का हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा और उड़ान सेवाएं प्रभावित हुईं।
पिछले महीने अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान ने इसमें गारंटर की भूमिका निभाई थी। समझौते के तहत तकनीकी स्तर की बातचीत के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन नए हमलों के बाद यह प्रक्रिया प्रभावित होती नजर आ रही है।
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