IRCTC होटल घोटाला: लालू यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने ED से मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- CBI की एफआईआर में 2004 से 2014 के बीच आपराधिक साजिश रचे जाने का आरोप लगाया गया है।
- मामले में सुजाता होटल्स की मालिक सरला गुप्ता और IRCTC के अधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख है।
- सरला गुप्ता, राज्यसभा सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने IRCTC होटल घोटाला मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। लालू यादव ने निचली अदालत द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने बृहस्पतिवार को ED को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
ED का मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर से जुड़ा है। CBI का आरोप है कि लालू यादव ने 2004 से 2014 के बीच आपराधिक साजिश रची थी। इस मामले में सुजाता होटल्स की मालिक सरला गुप्ता और IRCTC के अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। सरला गुप्ता, लालू यादव के करीबी सहयोगी और राज्यसभा सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी हैं।
आरोप है कि लालू यादव ने अपने और अन्य लोगों के लिए अनुचित वित्तीय लाभ हासिल किया। अपनी याचिका में यादव ने कहा कि निचली अदालत ने केवल अनुसूचित अपराध में आरोप तय होने के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए। उन्होंने दलील दी कि वह कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी किसी प्रक्रिया या गतिविधि में कभी शामिल नहीं रहे।
निचली अदालत के आदेश को दी चुनौती
लालू प्रसाद यादव ने अपनी याचिका में निचली अदालत के आदेश को कानून की दृष्टि से विकृत और अस्थिर बताया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ED ने उन्हें जांच के लिए कभी तलब नहीं किया। यादव ने इसे इस बात के संदर्भ में उठाया कि वह कथित अपराध की आय से जुड़ी किसी गतिविधि में शामिल नहीं थे।
निचली अदालत ने 10 सितंबर को लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और छह अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया था।
ED ने लगाए निविदा में हेरफेर के आरोप
ED के आरोपों के मुताबिक, 2005 से 2014 के बीच लालू यादव के नेतृत्व में निविदा प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। आरोप है कि रेलवे अधिकारियों ने रांची और पुरी स्थित रेडियो होटलों का पट्टा सुजाता होटल्स को देने के लिए ऐसा किया।
इस मामले में कुल 16 आरोपी थे, जिनमें से निचली अदालत ने सात को बरी कर दिया था। वहीं, CBI के मामले में निचली अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में ही लालू यादव और 11 अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय कर दिए थे।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.