ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल, मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली। ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के विकास और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर कई अहम स्पष्टीकरण मांगे हैं।
निजी भागीदारी और प्रक्रिया पर सवाल
जयराम रमेश ने पत्र में पूछा है कि ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी तय करने हेतु निविदाएं कब जारी की जाएंगी और चयन की प्रक्रिया क्या होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि यदि परियोजना में निजी क्षेत्र की न्यूनतम हिस्सेदारी 55 प्रतिशत तय है, तो क्या पूर्ण निजी स्वामित्व की भी अनुमति होगी या सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका सीमित रहेगी।
स्वामित्व और वित्तीय मॉडल पर चिंता
कांग्रेस नेता ने विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) में स्वामित्व संरचना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि क्या 55 प्रतिशत निजी हिस्सेदारी का अर्थ 100 प्रतिशत निजी नियंत्रण की संभावना को भी खुला छोड़ता है। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या बंदरगाह परिसंपत्तियों का स्वामित्व कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों तक सीमित रह सकता है, या इसमें विविध भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब परियोजना के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार किया जा चुका है, तो क्या मंत्रालय अपने बजट से वित्तीय सहायता देगा।
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता
जयराम रमेश ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट से क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी और प्रवाल भित्तियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
पहले भी उठा चुके हैं सवाल
कांग्रेस नेता इससे पहले भी पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिख चुके हैं। इन पत्रों में उन्होंने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की पारदर्शिता और संभावित पारिस्थितिकीय नुकसान पर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस का आरोप है कि गलाथिया बे क्षेत्र में प्रस्तावित पोर्ट परियोजना से बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय क्षति हो सकती है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि परियोजना को रक्षा और अवसंरचना विकास के नाम पर पेश किया जा रहा है, जबकि इसके पीछे निजी हितों को बढ़ावा देने की आशंका है।
परियोजना का दायरा
ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के साथ-साथ एक नागरिक एवं नौसैनिक हवाईअड्डा, टाउनशिप और बिजली संयंत्र विकसित करने की योजना शामिल है।
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