नेस्ले और कॉम्प्लान को FSSAI का नोटिस, विज्ञापनों में भ्रामक दावों पर मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- FSSAI ने दोनों कंपनियों को निर्धारित समय सीमा में जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा है।
- नेस्ले से व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने संबंधी दावे का वैज्ञानिक आधार मांगा गया है।
- नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 में 5 HMOs से इम्युनिटी सपोर्ट के दावे पर सवाल उठाए गए हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को उनके कुछ उत्पादों के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर कथित भ्रामक दावों के मामले में नोटिस जारी किया है। खाद्य नियामक ने दोनों कंपनियों से अपने दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही उनसे यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि नियमों के उल्लंघन के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
FSSAI ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि नेस्ले इंडिया के दो बेबी फूड उत्पादों, 'लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर' और 'नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1' के विज्ञापनों में किए गए कुछ दावे निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए। वहीं, जायडस वेलनेस प्रोडक्ट्स लिमिटेड को उसके लोकप्रिय हेल्थ ड्रिंक कॉम्प्लान की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावों को लेकर नोटिस भेजा गया है।
लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर के दावे पर FSSAI ने मांगा जवाब
FSSAI के अनुसार, नेस्ले इंडिया ने अपने उत्पाद लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर की पैकेजिंग और विज्ञापनों में दावा किया है कि इसमें व्हे प्रोटीन मौजूद है। यह दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जिसे आसानी से पचने वाला बताया गया है।
खाद्य नियामक ने कंपनी से इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही यह भी पूछा है कि व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने संबंधी दावे को साबित करने के लिए उसके पास कौन से वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। नेस्ले इंडिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित दस्तावेज और जरूरी वैज्ञानिक सबूत जमा करने का निर्देश दिया गया है।
नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के इम्युनिटी संबंधी दावे पर आपत्ति
नेस्ले इंडिया के एक अन्य उत्पाद 'नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1' की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावों को लेकर भी FSSAI ने सवाल उठाए हैं। कंपनी का दावा है कि इस उत्पाद में मौजूद '5 HMOs' सामान्य इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद करते हैं।
नियामक के मुताबिक, इस दावे से यह संकेत मिलता है कि उत्पाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक है। FSSAI ने कहा कि यह दावा उन नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिनके तहत खाद्य उत्पादों को लेकर बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम, राहत, उपचार अथवा उन्हें ठीक करने से जुड़े दावों पर प्रतिबंध है। ऐसे दावे केवल तभी किए जा सकते हैं, जब संबंधित नियमों में इसकी स्पष्ट अनुमति दी गई हो।
FSSAI ने नेस्ले इंडिया से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
कॉम्प्लान के दोगुनी तेजी से विकास के दावे पर सवाल
जायडस वेलनेस के हेल्थ ड्रिंक कॉम्प्लान की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावों पर भी खाद्य नियामक ने आपत्ति जताई है। FSSAI के मुताबिक, कॉम्प्लान की पैकेजिंग पर दो बच्चों की तस्वीरों के साथ उत्पाद से जुड़े कई दावे किए गए हैं।
इनमें दोगुनी तेजी से शारीरिक विकास, एकाग्रता और याददाश्त में मदद, इम्युनिटी को सपोर्ट करने तथा 34 जरूरी पोषक तत्व होने जैसे दावे शामिल हैं। नियामक ने इन दावों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है।
दोनों कंपनियों को देने होंगे वैज्ञानिक प्रमाण
FSSAI ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस से उनके उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए गए दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं। नियामक ने दोनों कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।
फिलहाल दोनों कंपनियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, नोटिस जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित उत्पादों को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। यह मामला मुख्य रूप से उत्पादों के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर किए गए दावों की सत्यता तथा निर्धारित नियमों के अनुपालन से संबंधित है।
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