SIR और वोटर रजिस्ट्रेशन पर खरगे ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने रखीं चुनाव प्रक्रिया को लेकर 5 मांगें

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में खरगे ने दिया संबोधन
- चुनाव आयोग पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौते का आरोप
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान तेज करने की बात
- वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर आरोप
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और वोटर रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव के जरिए उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता किया है।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार के खिलाफ अपना अभियान और तेज करेगी। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना पार्टी की जिम्मेदारी है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान वोटिंग अधिकार के लिए कांग्रेस के संघर्ष और वोटर लिस्ट को लेकर चल रहे मौजूदा अभियान के बीच समानता भी बताई।
खरगे का मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार की कठपुतली की तरह काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों को पूरी कानूनी मंजूरी मिली हुई है और आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है।
फॉर्म 6 में बदलाव पर भी सवाल
खरगे ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे युवा वोटर मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की तुलना 1988 में राजीव गांधी सरकार के उस फैसले से भी की, जिसके तहत मतदान की उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी गई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "उन्होंने नौकरियां नहीं दीं और अब वे वोट देने का अधिकार भी नहीं देना चाहते।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के सवालों से डरती है।
खरगे ने राहुल गांधी के वोटर लिस्ट से जुड़े आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने महादेवपुरम, आलंद और हरियाणा व महाराष्ट्र के निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर लिस्ट को लेकर सवाल उठाने के लिए राहुल गांधी की तारीफ भी की।
उन्होंने डुप्लीकेट वोटर, संदिग्ध पते, एक ही पते पर कई वोटरों के रजिस्ट्रेशन और फॉर्म 6 से जुड़ी एंट्रीज के आरोपों का जिक्र किया। खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, "अगर चुनाव आयोग ने उस दिशा में थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज वे सवालों के घेरे में नहीं होते और उनकी विश्वसनीयता बनी रहती।"
एसआईआर से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर सवाल
खरगे ने एसआईआर से संबंधित फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या यह जानना गलत था कि इस प्रक्रिया को किसने मंजूरी दी और दो चुनाव आयुक्तों को कथित तौर पर इंटरनल पोर्टल से दूर क्यों रखा गया।
कांग्रेस की पांच मांगें
खरगे ने कहा कि कांग्रेस इन पांच मांगों को लेकर आगे बढ़ेगी-
वोटर लिस्ट में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। जिन वोटर्स के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जाए और अपील करने का पूरा अवसर दिया जाए।
राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट और उससे संबंधित जरूरी डेटा आसान फॉर्मेट में और समय पर उपलब्ध कराया जाए।
गंभीर गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच तय समय-सीमा के भीतर कराई जाए।
चुनाव से संबंधित डेटा और फैसले पारदर्शी होने चाहिए, ताकि कोई भी राजनीतिक दल यह दावा न कर सके कि जानकारी छिपाई जा रही है।
खरगे ने कहा, "सबसे जरूरी बात यह है कि भारत के वोटर्स को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है।"
खरगे ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी और आरएसएस पर स्वतंत्र संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयोग इतना मजबूत हो कि सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष, दोनों का उस पर भरोसा बना रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों को मनमाना और अनुचित बताया था। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को हटाया जाना चाहिए।
खरगे ने नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके दबाव में काम किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मौजूदा विवाद की तुलना नोटबंदी से की। उन्होंने वोटर लिस्ट से वोटरों के कथित तौर पर नाम हटाए जाने को 'वोट की नोटबंदी' करार दिया।
उन्होंने कहा, "नोटबंदी के समय गरीब लोग लाइन में खड़े थे। वोट नोटबंदी में गरीबों को लाइन से ही बाहर कर दिया गया है।"
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