अमेरिका का 8 बड़ी आईटी कंपनियों पर बड़ा एक्शन, PERM प्रोग्राम से किया निलंबित

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को फैसले की घोषणा की।
- घोषणा के दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे।
- आठ कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अमेरिका ने बड़ी आईटी कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए आठ कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम यानी स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, अब इन कंपनियों से जुड़े नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। इस दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख भी मौजूद रहे।
किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
कीथ सोंडरलिंग ने बताया कि दुनिया की कुछ बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया है।
इस फैसले के बाद इन कंपनियों से जुड़े नए स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। वहीं, पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी।
30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन का दावा
अमेरिकी श्रम मंत्री ने कंपनियों के पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2009 से अब तक केवल इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए हैं। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर किए गए हैं।
इसके अलावा एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन जारी किए गए हैं। सोंडरलिंग ने दावा किया कि इसके कारण अमेरिकी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सैकड़ों हजारों नौकरियां प्रभावित हुईं।
माइक्रोसॉफ्ट पर जेडी वेंस ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस कार्रवाई के दौरान माइक्रोसॉफ्ट को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका आने वाले विदेशी कर्मचारियों को लेकर सवाल उठाए।
व्हाइट हाउस में फैसले की घोषणा के दौरान वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट में कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के बीच संबंध होने का दावा किया।
फिर चर्चा में आया H-1B वीजा कार्यक्रम
अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक इस कार्यक्रम को अमेरिकी कर्मचारियों के हितों से जोड़कर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां एच-1बी कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।
वहीं, तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां लंबे समय से इस कार्यक्रम को कुशल पेशेवरों की जरूरत पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण बताती रही हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर क्या पड़ेगा असर?
स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में आठ बड़ी आईटी कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किए जाने से उनके विदेशी कर्मचारियों से जुड़े स्थायी रोजगार प्रमाणन आवेदनों पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि निलंबित कंपनियों से जुड़े नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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