मोदी कैबिनेट ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए 17,314 करोड़ रुपये की दो योजनाओं को दी मंजूरी

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 17,314 करोड़ रुपये की दो योजनाओं को मंजूरी दी।
- 92 GWh की ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये का VGF स्वीकृत।
- योजना में 30 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और 60 GWh पंप स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से दो बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें 92 GWh की ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए 14,500 करोड़ रुपये के व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी मिली है।
इन दोनों योजनाओं पर कुल 17,314 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ये फैसले लिए गए। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को इसकी जानकारी दी।
ऊर्जा भंडारण से जुड़ी योजना वित्त वर्ष 2027 से 2031 के बीच लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य भारत को वर्ष 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाना है। देश की ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिहाज से इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा भंडारण योजना के तहत क्या होगा?
सरकार की इस योजना का लक्ष्य तीन अलग-अलग तकनीकों के माध्यम से कुल 92 GWh भंडारण क्षमता विकसित करना है। इसमें 30 GWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और 60 GWh की पंप स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही 2 GW की उभरती ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों को भी विकसित किया जाएगा।
इस योजना को पांच वर्षों की अवधि में यानी 2030-31 तक लागू किया जाएगा। इसके तहत मिलने वाला व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने में मदद करेगा।
महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण की क्षमता विकसित करना है।
लिथियम और निकल जैसे खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों में किया जाता है। ऐसे में इन खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने से भारत की रणनीतिक संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये योजनाएं?
ऊर्जा भंडारण और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण से जुड़ी दोनों योजनाएं भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास के लिए अहम मानी जा रही हैं।
ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी। वहीं, महत्वपूर्ण खनिजों का देश में ही प्रसंस्करण होने से आयात पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीमित करने में मदद मिलेगी।
इन पहलों के जरिए भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अपने प्रयासों को और मजबूत कर सकेगा।
सरकारी आंकड़ों की व्यवस्था में बदलाव के लिए VISTAR योजना को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश की आधिकारिक सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण योजना को स्वीकृति दी। स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च फॉर विकसित भारत इनिशिएटिव (VISTAR) नाम की इस योजना पर 4,371.1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह योजना पांच वर्षों के लिए होगी और वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में एक ऐसी आधिकारिक सांख्यिकीय व्यवस्था विकसित करना है, जो गतिशील, रियल-टाइम और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो।
VISTAR योजना के तहत आंकड़ों को समय पर उपलब्ध कराने, डेटा की विस्तृत जानकारी सुनिश्चित
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