दुष्कर्म के आरोपी जज संभाल रहे पॉक्सो केस, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया।
- न्यायिक अधिकारी पर एक महिला के यौन शोषण और दुष्कर्म का आरोप है।
- महिला ने 8 दिसंबर 2022 को दिल्ली के मयूर विहार थाने में FIR दर्ज कराई थी।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई है। न्यायिक अधिकारी पर दुष्कर्म का आरोप है। याचिका में इस बात पर भी सवाल उठाया गया है कि दुष्कर्म के मामले में आरोपी होने के बावजूद संबंधित न्यायिक अधिकारी पॉक्सो मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि आरोपी न्यायिक अधिकारी से न्यायिक कार्य वापस लिया जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस कर रही मामले की जांच
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में आदेश जारी किया। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था।
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पर एक महिला के यौन शोषण का आरोप है। इस मामले में दिल्ली पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कम से कम संबंधित न्यायिक अधिकारी को न्यायिक जिम्मेदारियों से अलग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने संक्षिप्त आदेश जारी करते हुए नोटिस भेजने और 11 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा।
मयूर विहार थाने में 8 दिसंबर 2022 को दर्ज हुई थी FIR
महिला ने 8 दिसंबर 2022 को दिल्ली के मयूर विहार पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने एक न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाया था, जिनसे उसकी मुलाकात एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी।
महिला के मुताबिक, आरोपी अधिकारी ने उससे शादी करने का बार-बार वादा किया और इसी भरोसे पर शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने आरोप लगाया कि शादी का वादा झूठा था।
जनवरी 2023 में दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी। महिला के अनुसार, इसके करीब दो महीने बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी थी। हालांकि, पुलिस को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
जांच में सहयोग करने का दिया गया था निर्देश
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने महिला का बयान दर्ज कराया। जून 2023 में दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को दोबारा पत्र भेजकर न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने की अनुमति पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया।
इसके जवाब में हाई कोर्ट ने बताया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ पहले से ही विजिलेंस जांच चल रही है।
अक्टूबर 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मामले की जांच की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। आगे चलकर यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, जहां अब शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन से जवाब मांगा है।
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