मुजफ्फरनगर: इंडो-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में 50 किसान संगठनों ने बनाया 'भारत बचाओ मोर्चा'

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में करीब 50 किसान संगठनों ने 'भारत बचाओ मोर्चा' का गठन कर प्रस्तावित इंडो-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया।
- संगठनों ने 15 जुलाई को ज्ञापन और 21 जुलाई को दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन करने की घोषणा की।
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रविवार को विभिन्न किसान संगठनों की अहम बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों और प्रस्तावित भारत-अमेरिका (इंडो-अमेरिका) ट्रेड डील के खिलाफ संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। देशभर के करीब 50 किसान संगठनों ने एकजुट होकर "भारत बचाओ मोर्चा" के गठन की घोषणा की और आगामी आंदोलन का कार्यक्रम भी तय किया।
रुड़की रोड स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अवनीत पंवार के आह्वान पर आयोजित बैठक में कई राज्यों से किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में किसानों, मजदूरों और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर साझा संघर्ष का संकल्प लिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए चौधरी अवनीत पंवार ने कहा कि देश का किसान लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। फसलों के उचित दाम नहीं मिलने और कृषि क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के कारण किसानों की स्थिति कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अब सभी किसान संगठनों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचानी होगी।
बैठक के दौरान प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी तीखी चर्चा हुई। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने कहा कि यदि यह समझौता लागू होता है तो इसका सीधा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ सकता है। उनका दावा था कि विदेशी कृषि उत्पाद और सस्ता मिल्क पाउडर भारतीय बाजार में आने से स्थानीय किसानों और डेयरी कारोबार को नुकसान होने की आशंका है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 15 जुलाई को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर सभी सहयोगी संगठनों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए 14 जुलाई को बुलंदशहर में अगली बैठक आयोजित करने का भी फैसला लिया गया।
किसान संगठनों ने कहा कि आने वाले दिनों में विभिन्न राज्यों में जनसंपर्क अभियान चलाकर किसानों और आम लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक किया जाएगा, ताकि व्यापक स्तर पर आंदोलन को मजबूती मिल सके।
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