मुजफ्फरनगर पहुंचा BSF ASI का पार्थिव शरीर, शहीद का दर्जा देने की मांग पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

HIGHLIGHTS
- बारामुला में तैनात बीएसएफ एएसआई शिवदत्त की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हुई थी।
- पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी की मांग की।
- पत्नी ने कहा कि उनके पति आत्महत्या नहीं कर सकते, वहीं ग्रामीणों ने जांच पूरी होने तक विरोध जारी रखा।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के भोपा गांव निवासी बीएसएफ में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) शिवदत्त की ड्यूटी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शनिवार शाम उनका पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचा। शव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
सैकड़ों ग्रामीणों और परिजनों ने शिवदत्त को शहीद का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर भोपा-मोरना मार्ग पर जाम लगा दिया। इस दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए भारत माता की जय और शिवदत्त अमर रहें के नारे लगाए। चार घंटे बाद भी देर रात तक धरना जारी रहा।
बारामुला में तैनात थे शिवदत्त
शिवदत्त प्रजापति मूल रूप से मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र के शोरम गांव के रहने वाले थे। करीब 20 साल से उनका परिवार भोपा में रह रहा है।
शिवदत्त बीएसएफ की 175वीं बटालियन में जम्मू-कश्मीर के उत्तरी बारामुला के बोनियार क्षेत्र में तैनात थे। शुक्रवार को वहां संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी।
शनिवार शाम उनका पार्थिव शरीर भोपा स्थित उनके आवास पर पहुंचा। शव को देखकर परिजनों में कोहराम मच गया।
मौत के कारण को लेकर उठे सवाल
परिजनों ने पार्थिव शरीर लेकर आए जवानों से शिवदत्त की मौत का कारण पूछा। इस पर साथ आए निरीक्षक अनुराग ने बताया कि जानकारी के अनुसार मौत एक्सिडेंटल फायर यानी दुर्घटनावश गोली चलने से हुई है। उन्होंने कहा कि घटना की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इस बात को लेकर ग्रामीण और परिजन नाराज हो गए। इसके बाद निरीक्षक अनुराग ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान की कमांडेंट अवधेश कुमार से बात कराई। कमांडेंट ने भी जांच के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होने की बात कही।
मांगों को लेकर ग्रामीणों ने रोका अंतिम संस्कार
शिवदत्त को शहीद का दर्जा देने, तीन करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और आश्रित को नौकरी देने जैसी मांगों को लेकर सैकड़ों ग्रामीण और महिलाएं शव को सैनिक वाहन से उतारने से मना कर दिया।
लोग वाहन के आगे बैठ गए और जाम लगा दिया। उन्होंने अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया। देर शाम तक धरना और हंगामा जारी रहा। अधिकारी शिवदत्त की पत्नी राजेश, बेटे शिव कुमार, अजय और अन्य परिवार के सदस्यों को समझाने का प्रयास करते रहे।
कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे
शिवदत्त प्रजापति के आवास पर पहुंचने वालों में सांसद चंदन सिंह चौहान, जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल, विधायक पुत्री सुप्रिया पाल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, हरीश राठी, संजय रवि, तरुण प्रधान, जगपाल बरूकी, ओमप्रकाश प्रजापति और दारा सिंह प्रजापति सहित कई लोग शामिल रहे।
इसके अलावा उपजिलाधिकारी जानसठ रश्मि लांबा, तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता, सीओ लक्ष्मण वर्मा और सीओ जानसठ ऋषिका सिंह भी मौके पर मौजूद रहे।
पत्नी बोलीं- मेरे पति आत्महत्या नहीं कर सकते
शिवदत्त की पत्नी राजेश ने कहा कि उनके पति आत्महत्या नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार शाम शिवदत्त ने फोन पर परिवार से बात की थी और कहा था कि छुट्टी मिल गई है, रविवार को घर आ जाएंगे।
पत्नी ने भावुक होकर कहा कि वह रविवार को आने की बात कहकर गए थे, लेकिन शनिवार को ही लौटे और वह भी पैदल नहीं बल्कि दूसरों के कंधों पर।
बताया गया कि शिवदत्त करीब छह महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे।
पार्थिव शरीर पर हुई पुष्प वर्षा
जैसे ही एएसआई शिवदत्त का पार्थिव शरीर मुजफ्फरनगर भोपा बाईपास पहुंचा, लोगों ने भारत माता के जयकारों के साथ फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी।
इसके अलावा मखियाली, जट-मुझेडा, भोपा गंग नहर पर कांवड़ शिविर आयोजकों और कस्बे के लोगों ने भी पार्थिव शरीर पर पुष्प वर्षा की।
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