नेको डिफेंस का भारतीय सेना से कोई कारोबारी संबंध नहीं, रक्षा अधिकारियों ने किया स्पष्ट

HIGHLIGHTS
- नागपुर स्थित कंपनी का भारतीय सशस्त्र बलों के साथ कोई कारोबारी संबंध नहीं है।
- रक्षा अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने रक्षा मंत्रालय को भी कोई सप्लाई नहीं की है।
- नेको डिफेंस ने हाल में इटली की डाटासेल कंपनी का अधिग्रहण किया है।
नई दिल्ली। एस्टोनिया को यूक्रेन भेजे जाने वाले तोप के गोलों की आपूर्ति से जुड़े कथित सौदे वाली भारतीय कंपनी ने रक्षा मंत्रालय या भारतीय सशस्त्र बलों को कोई सामान सप्लाई नहीं किया है। रक्षा अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी स्पष्ट की। अधिकारियों के अनुसार, नागपुर स्थित इस कंपनी का रक्षा मंत्रालय के साथ भी किसी तरह का कारोबार या लेनदेन नहीं हुआ है।
यह सफाई एस्टोनिया में कथित गोला-बारूद खरीद को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आई है। इस विवाद के चलते एस्टोनिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा अधिकारियों ने कहा, "नेको डिफेंस का हमारे सशस्त्र बलों के साथ कोई कारोबारी संबंध या आपूर्ति आदेश नहीं है। हालांकि, उसकी वेबसाइट पर किए गए दावे के अनुसार, उसने राज्य पुलिस बलों को उपकरणों की आपूर्ति की हो सकती है।"
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया, "रक्षा मंत्रालय के साथ कंपनी का कोई संबंध या लेनदेन नहीं है।"
क्या है नेको डिफेंस कंपनी की कहानी?
नेको डिफेंस नागपुर स्थित कंपनियों के एक समूह का हिस्सा है, जो इस्पात निर्माण के कारोबार से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी ने हाल में इटली की छोटी कंपनी डाटासेल का अधिग्रहण किया है। डाटासेल छोटे हथियारों और गोला-बारूद के निर्माण से जुड़ी कंपनी है।
अधिकारियों ने बताया कि नेको डिफेंस की रोमानिया में भी एक विनिर्माण इकाई है। इस इकाई के पास एस्टोनिया को तोप के गोलों की आपूर्ति के लिए उन्हें भरने का अनुबंध है। इन गोलों को आगे यूक्रेन भेजे जाने की योजना है।
कहां से शुरू हुआ हथियार सौदे को लेकर विवाद?
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने 2 सितंबर को यूक्रेन के लिए 7.7 करोड़ यूरो (करीब 769 करोड़ रुपये) के गोला-बारूद सौदे को लेकर उठे विवाद और रक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन पर सवालों के बीच इस्तीफा दे दिया था।
- विवाद उस आरोप के बाद शुरू हुआ कि यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने में यूरोपीय संघ के फंड का इस्तेमाल ऐसी कंपनियों से खरीदारी के लिए किया गया, जिन्हें इस तरह के हथियार बनाने का पहले कोई अनुभव नहीं था।
- यूरोन्यूज ने एस्टोनिया के सार्वजनिक प्रसारक ईआरआर के हवाले से बताया था कि एस्टोनियाई सरकार ने 2024 में यूक्रेन के लिए तोप के गोले खरीदने का समझौता किया था। इसके लिए यूरोपीय संघ की यूरोपीय शांति सुविधा से 7 करोड़ यूरो की अग्रिम राशि दी गई थी।
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