बिहार कैबिनेट ने 10 प्रस्तावों को दी मंजूरी, युवाओं और उच्च शिक्षा पर बड़ा फोकस

HIGHLIGHTS
- कुशल युवा कार्यक्रम के लिए 2026-27 में 430.0833 करोड़ रुपये मंजूर
- 6,436 प्रशिक्षण केंद्रों पर हर साल करीब 2.57 लाख युवाओं को ट्रेनिंग मिलेगी
- सोलर, ड्रोन, नेटवर्किंग और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में युवाओं और उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने कुल 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
इनमें कुशल युवा कार्यक्रम को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने, निजी आईटीआई में संयुक्त प्रवेश व्यवस्था और निजी बीएड कॉलेजों को बहुविषयक डिग्री महाविद्यालय के रूप में विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
2030-31 तक जारी रहेगा कुशल युवा कार्यक्रम
सात निश्चय-3 के निश्चय-1 ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के तहत बिहार कौशल विकास मिशन के कुशल युवा कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक बढ़ा दिया गया है।
योजना के संचालन के लिए 2026-27 में 430.0833 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार रोजगार के लिए तैयार करना है।
AI से ड्रोन तक नए जमाने की ट्रेनिंग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए प्रशिक्षण के स्वरूप में भी बदलाव किया जाएगा।
युवाओं को सोलर, ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड लैब तकनीशियन और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा ब्यूटी एवं वेलनेस, वेब इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी और डिजिटल मार्केटिंग को भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
6,436 केंद्रों पर हर साल 2.57 लाख युवा होंगे प्रशिक्षित
सरकार के मुताबिक, कार्यक्रम के तहत 6,436 प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जाएंगे। इन केंद्रों के जरिए हर साल करीब 2.57 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं के लिए नौकरी के साथ अपना उद्यम शुरू करने के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे युवा खुद रोजगार हासिल करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकेंगे।
निजी आईटीआई में संयुक्त प्रवेश से होगा नामांकन
कैबिनेट ने निजी आईटीआई में नामांकन को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। निजी आईटीआई की 50 प्रतिशत सीटों पर संयुक्त प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से नामांकन कराने का प्रावधान किया गया है।
इस व्यवस्था के जरिए नामांकन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
निजी बीएड कॉलेजों में शुरू हो सकेंगे नए विषय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य में संचालित एकल निजी बीएड संस्थानों को अब बहुविषयक डिग्री महाविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
कैबिनेट ने इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद पात्र निजी शिक्षक शिक्षा संस्थानों में बीएड के साथ कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित अन्य स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता खुलेगा।
विद्यार्थियों को एक ही संस्थान में मिलेंगे कई विकल्प
नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालय, यूजीसी, एनसीटीई और राज्य सरकार के तय मानकों तथा आवश्यक स्वीकृतियों का पालन करना होगा।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से विद्यार्थियों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्रों में ही उच्च शिक्षा के ज्यादा विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।
इससे उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होने के साथ राज्य के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और उच्च शिक्षा पर कैबिनेट का फोकस
कैबिनेट के फैसलों में युवाओं को रोजगारपरक कौशल देने और विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के विकल्प बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
कुशल युवा कार्यक्रम के विस्तार से बड़ी संख्या में युवाओं को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण मिलेगा। वहीं, निजी बीएड कॉलेजों को बहुविषयक संस्थानों के रूप में विकसित करने से उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा।
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