फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस का बड़ा ऐलान, दक्षिण चीन सागर पर नहीं झुकेगा देश

HIGHLIGHTS
- दक्षिण चीन सागर पर फिलीपींस ने दोहराया अपना दावा।
- मार्कोस ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए।
- परमाणु ऊर्जा परियोजना फिर शुरू करने पर विचार।
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डीनेंड मार्कोस जूनियर ने अपने 'स्टेट ऑफ द नेशन' संबोधन में विदेश नीति, भ्रष्टाचार और ऊर्जा सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा और वर्ष 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले का पूरी तरह सम्मान करेगा। इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों में अपने करीबी नेताओं पर भी कार्रवाई के संकेत दिए और परमाणु ऊर्जा परियोजना को दोबारा शुरू करने की योजना का भी उल्लेख किया।
दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन को दिया स्पष्ट संदेश
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा कि फिलीपींस किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने दोहराया कि देश अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वर्ष 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा। इस फैसले में दक्षिण चीन सागर पर चीन के व्यापक दावों को खारिज किया गया था। मार्कोस ने कहा कि फिलीपींस के नागरिक स्वाभिमानी हैं और किसी भी ताकत के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है।
भाषण की पांच प्रमुख बातें
- दक्षिण चीन सागर पर वर्ष 2016 के अंतरराष्ट्रीय फैसले से कोई समझौता नहीं करने का ऐलान।
- चीनी मीडिया के एआई वीडियो और कार्टून को लेकर फिलीपींस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रपति ने अपने चचेरे भाई और पूर्व स्पीकर मार्टिन रोमुआल्डेज के खिलाफ जांच के संकेत दिए।
- भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में करीब 25 अरब पेसो की नकदी और संपत्ति जब्त या फ्रीज किए जाने की जानकारी दी गई।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुराने परमाणु बिजली संयंत्र को दोबारा शुरू करने की योजना पर विचार करने की बात कही गई।
एआई वीडियो और कार्टून को लेकर बढ़ा विवाद
हाल ही में चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली से जुड़े एक एआई वीडियो और कार्टून में फिलीपींस के लोगों को कथित तौर पर अपमानजनक तरीके से दिखाया गया। इस पर फिलीपींस सरकार ने कड़ा विरोध जताते हुए चीन के राजदूत जिंग क्वान को तलब किया।
राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा कि फिलीपींस न लालची है, न झूठा और न ही नस्लवादी। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह वीडियो सरकार का आधिकारिक रुख नहीं है। इसके बावजूद बीजिंग ने वर्ष 2016 के अंतरराष्ट्रीय फैसले को अब भी अमान्य बताया है। इसके जवाब में मार्कोस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (यूएनसीएलओएस) के तहत यह फैसला अंतिम और बाध्यकारी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने करीबी नेताओं पर भी कार्रवाई के संकेत
राष्ट्रपति मार्कोस ने घरेलू राजनीति पर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी छूट नहीं मिलेगी, चाहे वह उनका करीबी रिश्तेदार ही क्यों न हो। उन्होंने संकेत दिए कि उनके चचेरे भाई और पूर्व हाउस स्पीकर मार्टिन रोमुआल्डेज के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी विशेष अभियोजक जल्द कार्रवाई कर सकते हैं।
रोमुआल्डेज पर बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और रिश्वत लेने के आरोप हैं, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है। सरकार के अनुसार, इस मामले में अब तक करीब 25 अरब पेसो (लगभग 410 मिलियन डॉलर) की नकदी और संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा चुकी है।
परमाणु ऊर्जा परियोजना को फिर से शुरू करने पर विचार
राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा कि ईरान युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ऊर्जा सुरक्षा को नई चुनौती दी है। ऐसे में फिलीपींस को परमाणु ऊर्जा के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में बाटान प्रांत में एक परमाणु बिजली संयंत्र बनाया गया था, लेकिन सुरक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़े विवादों के चलते उसे कभी चालू नहीं किया गया। अब सरकार आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप इस परियोजना का दोबारा मूल्यांकन करने की योजना बना रही है।
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