PM E-DRIVE से GARC को 221.13 करोड़, EV और सेफ्टी टेस्टिंग के लिए अपग्रेड हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर

HIGHLIGHTS
- चेन्नई के ओरागडम स्थित GARC में अपग्रेडेशन का काम शुरू
- PM E-DRIVE योजना के तहत 221.13 करोड़ रुपये आवंटित
- टेस्टिंग एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए 780 करोड़ रुपये निर्धारित
- लगभग सभी प्रस्तावित उपकरणों के लिए खरीद ऑर्डर जारी
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चेन्नई के ओरागडम स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) ने अपने टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नेशनल ऑटोमोटिव बोर्ड के तहत संचालित यह सेंटर नए और अत्याधुनिक उपकरण स्थापित कर रहा है।
सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के तहत अधिकृत टेस्टिंग एजेंसी के रूप में GARC पावरट्रेन, एमिशन (उत्सर्जन), ईएमसी, फटीग, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेफ्टी टेस्टिंग के क्षेत्रों में व्हीकल और कंपोनेंट टेस्टिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), होमोलोगेशन तथा सर्टिफिकेशन सेवाएं उपलब्ध कराता है।
PM E-DRIVE योजना के तहत GARC को कितना बजट मिला है?
भारत सरकार की PM E-DRIVE (PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) (पीएम ई-ड्राइव) योजना के लिए कुल 10,900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें से 780 करोड़ रुपये टेस्टिंग एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए रखे गए हैं। यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी।
इस योजना के तहत GARC को 221.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सेंटर ने प्रस्तावित लगभग सभी उपकरणों की खरीद के लिए ऑर्डर जारी कर दिए हैं। इनमें एडवांस पैसिव सेफ्टी टेस्टिंग के लिए डमी और डमी कैलिब्रेशन उपकरण, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) टेस्टिंग के लिए सॉफ्ट टारगेट और इंस्ट्रूमेंट्स तथा ऑटोमोटिव कंपोनेंट टेस्टिंग जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं।
क्रैश टेस्ट और सेफ्टी एनालिसिस के लिए कौन सी नई तकनीकें जोड़ी जा रही हैं?
खरीदे गए उपकरणों की स्थापना का काम भी शुरू हो चुका है। इस अपग्रेडेशन में हाई-स्पीड और हाय-रेजोल्यूशन इमेजिंग सिस्टम को प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है।
कैमरा क्षमता: इसमें UHD-4K कैमरे शामिल हैं, जो 750 fps (फ्रेम्स प्रति सेकंड) तक काम कर सकते हैं। वहीं, फुल एचडी रिकॉर्डिंग 3,000 fps तक की जा सकती है।
क्रैश टेस्ट एनालिसिस: यह सिस्टम कार के फ्रंटल (सामने), साइड (बगल) और रियर (पीछे) क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन के विरूपण, यात्रियों की हलचल और एयरबैग खुलने जैसे महत्वपूर्ण क्षणों को बारीकी से रिकॉर्ड करेगा। इससे वाहनों की विस्तृत सुरक्षा जांच और होमोलोगेशन में बड़ी मदद मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड से भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को क्या फायदा होगा?
पीएम ई-ड्राइव के सहयोग से GARC में तैयार किया जा रहा यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर स्वदेशी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह इंफ्रास्ट्रक्चर इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम्स, ADAS, भारी वाणिज्यिक वाहनों और उभरती ऑटो तकनीकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इन निवेशों के जरिए GARC एक सुरक्षित, तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के निर्माण में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।
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