लौह पुरुष की जयंती पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, बोले- उनका समर्पण देश के लिए मिसाल

HIGHLIGHTS
- पटेल चौक पर आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति और दिल्ली के कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
- अमित शाह ने सरदार पटेल को उचित सम्मान न देने का आरोप कांग्रेस पर लगाया।
- 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है।
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के मौके पर शनिवार को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के पटेल चौक पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स के जरिए सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “अखंड भारत के प्रणेता देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मां भारती की सेवा में उनका त्याग और समर्पण विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत है।”
पटेल चौक के कार्यक्रम में कई नेता शामिल
दिल्ली के पटेल चौक पर आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं और उन्होंने श्रद्धांजलि दी।
अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक सरदार पटेल को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं दिया और उनकी स्मृतियों को मिटाने की कोशिश की। शाह ने कहा, “कई वर्षों तक भारत ने सरदार साहब को उनके योगदान के लिए वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में हकदार थे। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सरदार साहब की स्मृतियों को मिटाने की कोशिश की है। हालांकि, सूरज की चमक को छिपाया नहीं जा सकता।”
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण कराया गया, जिससे सरदार पटेल की विरासत को पूरे देश के सामने मजबूती से स्थापित किया गया। शाह के मुताबिक, यह विशाल प्रतिमा आसमान की ऊंचाइयों को छूती है।
31 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी, वकील और राजनेता थे। उन्हें भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के तौर पर जाना जाता है।
भारत सरकार ने 2014 में उनकी जयंती यानी 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू किया था। इस दिवस का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने का संदेश देना है।
इस अवसर पर देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’ और एकता मार्च जैसे आयोजन होते हैं। इस बार एकता नगर में ‘रन फॉर यूनिटी’ शाम को आयोजित की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को बनासकांठा के एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी और युवाओं से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की।
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