देश की विधानसभाओं के लिए एक जैसे नियम बनाने की तैयारी, दिल्ली में हुई बैठक

HIGHLIGHTS
- लोकसभा अध्यक्ष की गठित समिति ने आदर्श नियमों के प्रारूप और अनुशंसाओं पर विचार किया।
- उत्तर प्रदेश विधानसभा की नियमावली में कुछ साल पहले समीक्षा के बाद बदलाव किए गए थे।
- दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विशेष कानूनी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया।
नई दिल्ली। देश की विधानसभाओं में कामकाज के नियमों में एकरूपता लाने के उद्देश्य से सोमवार को दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित समिति ने विभिन्न विधानसभाओं के लिए आदर्श नियमों के प्रारूप और उनसे जुड़ी अनुशंसाओं पर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने की। उन्होंने कहा कि देशभर की विधानसभाओं की अपनी-अपनी नियमावलियां हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की नियमावली 1958 से लागू थी, जिसकी कुछ साल पहले समीक्षा कर उसमें बदलाव किए गए।
वहीं, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब देशभर की सभी विधानसभाओं के लिए एक जैसे नियम बनाए जाएंगे।
संवैधानिक प्रावधानों और विशेष व्यवस्थाओं पर जोर
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मॉडल नियम तैयार करते समय दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। इन क्षेत्रों की विधायिकाएं संवैधानिक प्रावधानों और विशेष कानूनों के तहत काम करती हैं।
इनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 भी शामिल है। उन्होंने द्विसदनीय विधायिकाओं के लिए उपयुक्त प्रावधान करने का सुझाव दिया। इसमें विधान परिषदों, उनके पीठासीन अधिकारियों, सचिवालय के अधिकारियों और दोनों सदनों के बीच आपसी व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल हैं।
नागालैंड को छोड़कर पांच राज्यों के प्रतिनिधि शामिल
बैठक में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पीठासीन पदों के चुनाव, सभापति तालिका के लिए नामांकन और अध्यक्ष के कार्यों को अन्य अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
बैठक में नागालैंड को छोड़कर पांच राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और दिल्ली की विधानसभाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक का उद्देश्य सदन की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करना था।
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