देहरादून में राहुल गांधी ने छात्रों से किया संवाद, पेपर लीक को बताया बड़ा संकट

HIGHLIGHTS
- देहरादून में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से संवाद किया और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार व परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए।
- राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही जरूरी है।
- कार्यक्रम में युवाओं ने रोजगार, भर्ती प्रक्रिया में देरी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं उठाईं।
देहरादून: करीब साढ़े चार वर्ष बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को देहरादून पहुंचे। यहां बन्नू कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों और युवाओं से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बताया और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं मेहनती छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं और इससे युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है।
राहुल गांधी ने रखी अपनी बात
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक लाखों छात्रों की मेहनत पर असर डालता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाओं में पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों और व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत को प्रभावित कर देती हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षाएं कराना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए, निजी कंपनियों की नहीं। उन्होंने सुरक्षित और छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता बताई। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में रैंडमाइजेशन लागू करने और पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाना चाहिए।
उन्होंने पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि जिन छात्रों को ऐसी घटनाओं से नुकसान हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। एक प्रभावित छात्रा के परिवार की कहानी सुनने के बाद उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
छात्रों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में कई छात्रों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। एक छात्रा ने बताया कि परीक्षा देने के बाद उसे पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिससे उसकी कई महीनों की मेहनत प्रभावित हुई। वहीं दूसरी छात्रा ने भर्ती परीक्षा दोबारा देने की मजबूरी का जिक्र किया।
छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
युवाओं ने रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए
'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और करियर के सीमित अवसरों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। युवाओं ने कहा कि वर्तमान समय में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है और इस दिशा में प्रभावी नीतिगत कदम उठाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने कहा कि डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार मिलना आसान नहीं है। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएं उनके सामने चुनौती बनी हुई हैं। युवाओं ने रोजगार सृजन और कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता भी बताई।
तनिषा ने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है और भर्ती प्रक्रियाएं समय पर पूरी न होने से निराशा बढ़ रही है।
सुर ने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए और युवाओं के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दिव्यांशी ने कहा कि सरकारी नौकरियों की संख्या घट रही है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं।
निष्कर्ष ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट की बात तो होती है, लेकिन इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर कम दिखाई देता है और रोजगार आज बड़ा मुद्दा बन चुका है।
प्रशांत ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता को आवश्यक बताया।
पियूष ने कहा कि यदि रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में यह बड़ी समस्या का रूप ले सकता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.