SIR पर पूर्व CEC एसवाई कुरैशी का बड़ा बयान, बोले- 13-14 करोड़ नाम हटाना ‘स्कैम’

HIGHLIGHTS
- पूर्व सीईसी ने भुवनेश्वर में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बयान दिया।
- उन्होंने देशभर में 13 से 14 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया।
- कुरैशी के मुताबिक हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत मतदान के योग्य हैं।
भुवनेश्वर: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रविवार को भुवनेश्वर में उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को 'अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण' बताया। कुरैशी ने कहा कि बड़े स्तर पर मतदाताओं के नाम हटाना एक 'स्कैम' है। उनका दावा है कि एक कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।
13-14 करोड़ नाम हटाए जाने पर सवाल
पूर्व सीईसी कुरैशी ने कहा कि देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी हैरानी जताई। उनके अनुसार, अदालत ने इस मामले में काफी नरम रुख अपनाया, जिसके कारण यह प्रक्रिया जारी रह सकी। कुरैशी ने दावा किया कि हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये सभी लोग दूसरी जगह चले गए हैं?
दूसरी जगह जाने वाले मतदाताओं को लेकर सवाल
कुरैशी ने कहा कि अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया है तो उसका नाम वहां की नई मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने केवल नाम हटाए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कुछ मतदाता पलायन कर गए हैं, तो उनके नाम नई जगह पर जोड़े जाने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि केवल नाम ही क्यों हटाए जा रहे हैं? क्या कोई दूसरी जगह से यहां नहीं आ रहा है? क्या सिर्फ लोग बाहर ही जा रहे हैं? उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को 'अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण' बताया।
योग्य मतदाता का नाम हटाना कितना गंभीर
एसवाई कुरैशी ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार है। उनके मुताबिक, यदि किसी कारण या बहाने से एक भी योग्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है तो यह असांविधानिक और गैरकानूनी है। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने के साथ आपराधिक जिम्मेदारी की बात भी कही। उनका कहना था कि प्रक्रियागत या नौकरशाही कारणों के आधार पर किसी नागरिक के मौलिक अधिकार को नहीं छीना जा सकता।
2002 की मतदाता सूची पर भी उठाए सवाल
एसआईआर के दौरान 2002 की मतदाता सूची से तुलना किए जाने को लेकर भी कुरैशी ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस सूची में भी गलतियां हो सकती हैं। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता का नाम भी 2002 की मतदाता सूची में गलत दर्ज था। इसलिए उनके अनुसार इस सूची का इस्तेमाल केवल संदर्भ के तौर पर किया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, 'क्या यह बाइबल से आई थी? क्या 2002 की मतदाता सूची में कोई गलती नहीं थी?'
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.