फ्लाइट टिकट महंगे होने और फीस वसूली पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र से जवाब तलब

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में उतार-चढ़ाव और एयरलाइंस के अतिरिक्त शुल्क को लेकर केंद्र से जवाब मांगा।
- अदालत ने भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार नियम दो सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया।
- याचिका में यात्रियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और स्वतंत्र विमानन नियामक की व्यवस्था की मांग की गई है।
नई दिल्ली। हवाई किराए में लगातार बदलाव और निजी एयरलाइंस की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए नियम दो सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र से कहा है कि नियमों को सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने रखा जाए। सरकार की ओर से बताया गया कि नियमों का मसौदा तैयार है और फिलहाल उसका अनुवाद किया जा रहा है।
यात्रियों के हित और पारदर्शिता से जुड़ा मामला
यह मामला हवाई किराए में अनियमितता, सहायक शुल्क और यात्रियों के हितों की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि विमानन क्षेत्र में निगरानी के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रभावी नियामकीय व्यवस्था के अभाव में निजी एयरलाइंस खासकर अधिक मांग वाले समय में किराए में अचानक बढ़ोतरी और कई तरह के अतिरिक्त शुल्क वसूल सकती हैं।
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 पर नजर
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 जनवरी 2025 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना और नियमों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है। हालांकि, इसके तहत बनाए जाने वाले नियमों की अधिसूचना अभी लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र सरकार को इन नियमों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, ताकि मामले में आगे की सुनवाई की जा सके।
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