चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डटे किसान, 47/48 लाइट प्वाइंट पर लगा मंच; ट्रैफिक डायवर्ट

HIGHLIGHTS
- 7 सितंबर तक दिन-रात धरना जारी रखने की तैयारी है।
- कई किसान संगठन अपने साथ करीब दो महीने का राशन लेकर पहुंचे हैं।
- धरनास्थल पर संगत के लिए लंगर की व्यवस्था शुरू हो गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने पानी और किसानों की कर्ज माफी समेत विभिन्न मांगों को लेकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर पक्का मोर्चा शुरू कर दिया है। यह आंदोलन 7 सितंबर तक जारी रहेगा।
सोमवार शाम से ही किसान जत्थेबंदियां मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर के फेज-11 इलाके में पहुंचने लगी थीं। मंगलवार सुबह तक बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल पर जमा हो गए और वहीं डटे रहे।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि चंडीगढ़ बॉर्डर पर एसकेएम का यह पहला बड़ा प्रदर्शन है। दिन-रात चलने वाले इस मोर्चे में किसानों की मांगों पर हर दिन चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रमुख मांगों में पानी से संबंधित पुराने समझौतों को रद्द करना शामिल है।
इसके अलावा, किसान गन्ने की फसल का उचित और समय पर भुगतान किए जाने की मांग कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी धरने के दौरान उठाया जाएगा। नेताओं ने कहा कि अगर सरकार बातचीत के लिए बुलाती है तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
गोल्फ क्लब से 47/48 लाइट प्वाइंट तक एक हिस्सा घेरा
किसानों ने गोल्फ क्लब से लेकर 47/48 लाइट प्वाइंट तक सड़क के एक हिस्से को धरने के लिए घेर लिया है। प्रशासन की सहमति से सड़क का दूसरा हिस्सा आम लोगों की आवाजाही के लिए खुला रखा गया है, ताकि चंडीगढ़ और मोहाली के बीच यातायात पूरी तरह बाधित न हो।
किसानों ने 47/48 लाइट प्वाइंट पर मंच बनाया है। धरने के कारण ट्रैफिक को अलग-अलग रास्तों से डायवर्ट किया गया है।
ट्रिब्यून चौक की तरफ से आइसर चौक आने वाला रास्ता खुला है और दोनों ओर का ट्रैफिक इसी मार्ग से निकाला जा रहा है। मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाले वाहन चालकों को आइसर चौक से सीपी मॉल की ओर भेजा जा रहा है।
वहीं, फेज-11 और अंदरूनी सड़कों से आने वाले वाहनों को गोल्फ क्लब की तरफ से जगतपुरा रोड के रास्ते चंडीगढ़ की ओर भेजा जा रहा है।
दो महीने का राशन लेकर पहुंचे किसान
किसान नेताओं के अनुसार, वे पूरी तैयारी के साथ मोर्चे पर पहुंचे हैं। कई जत्थेबंदियां अपने साथ करीब दो महीने का राशन लेकर आई हैं। धरना स्थल पर पहुंचने वाली संगत के लिए लंगर की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। गैस सिलेंडरों से भरी ट्रालियां भी मौके पर पहुंच चुकी हैं।
किसानों ने बताया कि सात दिनों तक दिन-रात धरना जारी रहेगा और वे इसी स्थान पर रहेंगे।
बीकेयू राजेवाल के जिला महासचिव लखविंदर सिंह ने कहा कि एसकेएम के सात दिवसीय धरने में पंजाब और केंद्र सरकार से संबंधित कई मांगें उठाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 2020 के दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से स्वीकार की गई कई मांगें अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं।
उनके संगठन की ओर से जिला प्रधान कृपाल सिंह सैहौदी के नेतृत्व में लंगर की सेवा भी शुरू की गई है।
500 ट्रालियां पहुंचने की उम्मीद
बीकेयू राजेवाल के मोहाली ब्लॉक प्रधान जसविंदर सिंह संधू ने बताया कि उनकी जत्थेबंदी की ओर से पंजाब भर से करीब 500 ट्रालियां पहुंचने की उम्मीद है। अन्य किसान संगठनों की तरफ से भी पूरा सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि कई जत्थेबंदियां सोमवार रात ही पहुंच गई थीं, जबकि बाकी मंगलवार दोपहर तक आने की उम्मीद है। इसके बाद धरना स्थल पर मंच की गतिविधियां शुरू होंगी।
बिजली और बीज संशोधन बिल का विरोध
किसान नेताओं ने बिजली संशोधन बिल और बीज संशोधन बिल समेत किसानों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि दिल्ली आंदोलन के दौरान जिन मांगों पर सहमति बनी थी, उन्हें लागू किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड समझौते का भी किसानों ने विरोध किया। किसानों का कहना है कि ऐसे समझौतों का असर देश के कृषि क्षेत्र और किसानों पर पड़ सकता है।
‘सरकार की नीतियों के खिलाफ, जनता के नहीं’
जसविंदर सिंह संधू ने कहा कि प्रशासन की सहमति से धरने के लिए सड़क का एक हिस्सा लिया गया है, जबकि दूसरा हिस्सा आम लोगों के लिए खुला रखा गया है। उन्होंने कहा कि किसान आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा, "हमारा आंदोलन सरकारों की नीतियों के खिलाफ है, लोगों के खिलाफ नहीं।"
उन्होंने पंजाब के राजनीतिक दलों पर भी किसानों और पंजाब से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
बारिश से निपटने की भी तैयारी
धरने के दौरान बारिश की संभावना को लेकर किसान हरदीप बैदवान ने कहा कि फिलहाल गर्मी का मौसम है और बारिश होने पर गर्मी से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसान अपने साथ तिरपाल भी लेकर पहुंचे हैं, इसलिए बारिश होने की स्थिति में भी धरना जारी रखने की तैयारी है।
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