SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा- नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है, EC की भूमिका वोटर लिस्ट तक सीमित है।
- वोटर लिस्ट से नाम हटने से किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म नहीं होती, मामले को संबंधित मंत्रालय भेजना होगा।
- SIR के बाद सरकारी योजनाओं से वंचित किए जाने के आरोपों वाली याचिका पर 25 अगस्त को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR विवाद पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और निगरानी तक सीमित है। ऐसे में कानून की स्थिति को लेकर कोई भ्रम नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल नहीं करने का फैसला करता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने के लिए उस मामले को संबंधित मंत्रालय के पास भेजना होगा। अदालत ने साफ किया कि सिर्फ मतदाता सूची में नाम नहीं होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं हो जाती।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए गए लोगों को PDS, अन्नपूर्णा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि नागरिकता निर्धारित करना निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने अपनी दलीलें रखीं।
उन्होंने अदालत को बताया कि 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों के काम करने के तरीके में व्यावहारिक स्तर पर असमानताएं और देरी देखने को मिल रही हैं। वकील ने कहा कि ट्रिब्यूनलों के कामकाज में आ रही दिक्कतों के कारण मामलों के निपटारे पर असर पड़ रहा है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, वे अभी भी कुछ कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के पात्र रहेंगे। इनमें सब्सिडी वाला राशन भी शामिल है।
हालांकि, अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता के राशन कार्ड निलंबित किए जाने को चुनौती दी गई थी। यह निलंबन पश्चिम बंगाल के खाद्य और आपूर्ति विभाग की ओर से जून में जारी आदेश के बाद किया गया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को कहा।
EC को पहले भी मिली थी राहत
इससे पहले मई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को राहत देते हुए SIR कराने की उसकी शक्ति को बरकरार रखा था। अदालत ने माना था कि बिहार में मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया शुरू करने का आदेश देकर आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट (RP Act) का उल्लंघन नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली पीठ ने कई राज्यों में मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया था।
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