'अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो खुद से सवाल करता...', गाली वाले वीडियो पर सोनम वांगचुक का बयान

HIGHLIGHTS
- सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन में इस्तेमाल आपत्तिजनक भाषा पर जताई नाराजगी
- उन्होंने कहा कि युवाओं की निराशा के पीछे के कारणों को समझना जरूरी है
- वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों को पेशेवर आंदोलनकारी मानने से इनकार किया
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाले कई वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर जब 26 दिनों तक अनशन कर चुके पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से सवाल किया गया तो उन्होंने अपशब्दों पर आपत्ति जताई।
एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में सोनम वांगचुक से जब पूछा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन युवाओं को भटका हुआ बताया है, तो उन्होंने कहा कि वह गाली-गलौज वाली भाषा का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के लिए यह समझने का संकेत है कि युवाओं में कितनी नाराजगी और निराशा बढ़ चुकी है।
सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री की जगह होते तो सबसे पहले खुद से यह सवाल करते कि ऐसा क्या हुआ, जिससे युवाओं में इतना गुस्सा पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि ये लोग पेशेवर प्रदर्शनकारी या सड़क के लोग नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग कोर्स में पढ़ने वाले वास्तविक रूप से परेशान युवा हैं।
'संदेश को समझें, संदेशवाहक को नहीं दबाएं'
वांगचुक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह स्थिति बताती है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "संदेश सुनो, संदेशवाहक को मत मारो।" उन्होंने कहा कि एफआईआर और उत्पीड़न जैसी कार्रवाई समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था को आत्ममंथन करना चाहिए और उसमें सुधार लाने की जरूरत है, ताकि कोई युवा इतना निराश न हो कि उसे ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना पड़े। उनके अनुसार एक अच्छे नेता को इसी तरह सोचने की जरूरत होती है।
हालांकि, सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि जो शरारती तत्व, पेशेवर उपद्रवी या हिस्ट्रीशीटर ऐसे आंदोलनों में शामिल होते हैं, उन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल भाषा के आधार पर सामान्य छात्रों या पूरे आंदोलन को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
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