लखीमपुर में स्वतंत्र देव सिंह का बयान, बोले- मोदी-योगी को छोड़ा तो माथे पर टीका नहीं बचेगा

HIGHLIGHTS
- स्वतंत्र देव सिंह ने जातिवाद, क्षेत्रवाद और परिवारवाद छोड़ने की अपील की।
- ओम बिरला ने लोकतंत्र में असहमति के सम्मान को अहम बताया।
- संत कबीर के विचारों और सामाजिक समरसता पर दिया गया जोर।
लखीमपुर: कबीरधाम, मुस्तफाबाद में संत असंग साहब के 60वें जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने लोगों से जातिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने राष्ट्रवाद को जातिवाद से अधिक जरूरी बताया। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
स्वतंत्र देव सिंह ने अपने संबोधन में राजनीतिक मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर लोगों ने मोदी-योगी को छोड़ दिया, तो माथे पर टीका नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि आज लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, तो इसका श्रेय योगी आदित्यनाथ को जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि ऑस्ट्रेलिया में भी किसी का बच्चा फंस जाता है, तो प्रधानमंत्री उसे निकालकर हिंदुस्तान ले आते हैं।
मंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में रात 12 बजे भी मां-बेटियां सुरक्षित आवागमन कर सकती हैं। उन्होंने लोगों से जातिवाद, क्षेत्रवाद, व्यक्तिवाद, परिवारवाद और वंशवाद को छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को केवल राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए, अन्यथा श्रीनगर के चौक पर तिरंगा नहीं लहरा पाएगा।
असहमति का सम्मान भी लोकतंत्र को बनाता है मजबूत: ओम बिरला
सम्मेलन के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ सहमति से नहीं, बल्कि असहमति का सम्मान करने से भी मजबूत होता है। विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन दूसरों के विचारों का सम्मान करना और अपनी वाणी पर संयम रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि किसी के बारे में बुरा सोचना, बुरा बोलना और बुरा करना पूरी तरह गलत है। व्यक्ति के समय और कर्म को हमेशा याद रखा जाता है।
ओम बिरला ने संत कबीर के विचारों को सामाजिक समरसता और सदाचरण का आधार बताते हुए लोगों से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लगभग छह सौ वर्ष पहले संत कबीर ने जिस समाज में रहते हुए अपनी रचनाओं के जरिए सुधार की अलख जगाई थी, उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उनके दोहे, चौपाइयां और लोकोक्तियां आम जनजीवन को दिशा देती हैं।
उन्होंने कहा कि संत कबीर ने जात-पात, ऊंच-नीच और धार्मिक आडंबरों के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सरल और सहज भाषा में समाज को जागरूक करने का प्रयास जारी रखा। देश उनके योगदान का हमेशा ऋणी रहेगा। ओम बिरला ने लोगों से अपील की कि वे कबीर के विचारों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और आचरण में भी अपनाएं।
भेदभाव के बिना समाज हित में काम करने पर जोर
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संत कबीर ने बिना किसी भेदभाव के समाज के हित में काम किया। इसी भावना के साथ केंद्र और प्रदेश सरकारें भी सबका साथ, सबका विकास के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकसित होने पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोए। वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय गुंडागर्दी के साथ दुकानों, मकानों और जमीनों पर कब्जे की घटनाएं आम थीं।
केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव का नाम लेते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक दिल्ली से उत्तर प्रदेश और लखीमपुर खीरी तक जनता का भरोसा कायम रहेगा। उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहले अपराधी पुलिस से नहीं डरते थे, बल्कि पुलिस अपराधियों से डरती थी।
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