SIR को लेकर तीनों चुनाव आयुक्तों ने की बैठक, 9 अहम फैसलों पर बनी सहमति

HIGHLIGHTS
- आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र की वजह स्पष्ट की।
- पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
- आयोग ने पत्र को आईटी डिविजन की नीति से जुड़ा होने से इनकार किया।
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विनीत जोशी ने शनिवार को पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक की। इसके साथ ही तीनों के बीच एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर मतभेद होने की अटकलों पर विराम लग गया।
पिछले तीन दिनों से जारी राजनीतिक घमासान के बीच शनिवार को तीनों चुनाव आयुक्त दोपहर तीन बजे आयोग में एक साथ बैठे। बैठक में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने के साथ आम लोगों की परेशानियों को कम करने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए।
तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी प्रेस विज्ञप्ति में एसआईआर से जुड़े फैसलों, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-छह में किए गए बदलाव और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर स्थिति स्पष्ट की गई।
विवाद सामने आने के बाद हुई पहली पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक में कुल नौ फैसले लिए गए। इनमें पांच फैसले मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को हो रही दिक्कतों से जुड़े हैं। चार फैसले चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज और उसमें अधिक पारदर्शिता लाने से संबंधित हैं। इसके अलावा तीन बिंदुओं पर फैलाए गए भ्रम को भी दूर किया गया।
तीनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को बिहार में एसआईआर कराने से लेकर बाद में पश्चिम बंगाल सहित अन्य 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू करने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में 25 मई 2027 को सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसलों पर मुहर लगाई थी। तीनों चुनाव आयुक्तों के अनुसार एसआईआर के बाद मतदाताओं की अंतिम संख्या 12 राज्यों में मौजूदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।
तीनों चुनाव आयुक्तों ने यह भी बताया कि कैबिनेट सचिव को दो चुनाव आयुक्तों की ओर से लिखा गया पत्र आयोग के आईटी डिविजन या नीतिगत मामलों से संबंधित नहीं था, जैसा कि बताया जा रहा था। यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी से जुड़ा था। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद संबंधित अधिकारी के फैसले को लागू नहीं किया गया। साथ ही आईटी डिविजन पर जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकार को कभी वापस नहीं लिया गया।
बैठक में गोवा के 97 मतदाताओं के फॉर्म-छह की सूची में अपलोड होने के मामले पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि गोवा के सीटीओ को इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं। इसमें मतदाताओं के घर-घर जाकर फॉर्म लेने और उन्हें सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी शामिल है। इनमें से 81 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जा चुके हैं।
नए वोटरों के फॉर्म-छह को लेकर स्थिति साफ
नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-छह के साथ घोषणापत्र देने की व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं के मतदाता सूची में शामिल नहीं होने की आशंका को भी तीनों चुनाव आयुक्तों ने खारिज किया। उनके मुताबिक यह व्यवस्था अस्थायी है और केवल एसआईआर के लिए लागू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया था।
एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए मतदाताओं को यह घोषणापत्र नहीं देना होगा। इस घोषणापत्र में नए मतदाताओं को अपने माता-पिता के नाम पुराने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में शामिल होने की जानकारी देनी होती थी।
अन्य अहम फैसले
- तर्कसंगत विसंगतियों के कारण नोटिस दिए गए मतदाताओं को ईआरओ और एईआरओ के सामने सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा।
- इसके बजाय बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेगा और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेगा।
- केवल विशेष मामलों में ही उन्हें ऑनलाइन सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। इसमें उनकी जगह उनका करीबी रिश्तेदार भी शामिल हो सकता है।
- रात्रि विश्राम स्थलों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने की व्यवस्था करेगा।
- ईसीआईनेट के नियमों और कानून सम्मत कामकाज की निगरानी के लिए वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें आईआईटी या आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
- दिल्ली के सीईओ को 30 अक्टूबर तक शिकायतों की सुनवाई और 30 नवंबर तक फैसला लेने का समय दिया गया है। महाराष्ट्र के लिए यह समय सीमा 12 अक्टूबर और 10 नवंबर होगी।
- आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठकों के मिनट्स भी तैयार किए जाएंगे।
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