भारतीय ध्वज वाले 3 तेल टैंकर ने पार किया होर्मुज, 94 चालक दल सदस्यों के साथ घर वापसी

नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक विकास सामने आया है। भारतीय ध्वज वाले तीन कच्चे तेल टैंकर— देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड— ने सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है और अब वे भारत की ओर अग्रसर हैं।
इन तीनों जहाजों में कुल मिलाकर 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल भरा हुआ है। साथ ही इनमें 94 भारतीय चालक दल के सदस्य भी सवार हैं, जो पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए पुष्टि की कि टैंकर सफलतापूर्वक इस अहम समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं और अब भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मंत्रालय लगातार संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है ताकि भारतीय नाविकों और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कब और कहां पहुंचेंगे टैंकर
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, देश वैभव 24 जून को गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि देश विभोर उसी दिन सिक्का बंदरगाह पर डॉक करेगा। वहीं सनमार हेराल्ड के 1 जुलाई तक ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों में कुछ सुधार देखा जा रहा है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सहमति के बाद इस मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में वृद्धि दर्ज की गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 20 जून को इस समुद्री मार्ग से 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल का परिवहन हुआ और शनिवार को 55 वाणिज्यिक जहाजों ने सुरक्षित पारगमन किया।
हालांकि, क्षेत्र में तनाव की स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल में संघर्षविराम उल्लंघन के आरोप लगाए थे और जलडमरूमध्य को लेकर बयान भी दिए थे।
इसके बावजूद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि फिलहाल इस मार्ग के बंद होने के कोई संकेत नहीं हैं और स्थिति स्थिर रहने की उम्मीद है।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
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