यूपी: राजस्व सेवाओं में बड़ा बदलाव, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाना हुआ आसान

HIGHLIGHTS
- ईडब्ल्यूएस पोर्टल पर आवेदन से लेकर उसके निस्तारण तक की प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी।
- सरलीकृत खतौनी में जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित होगा।
- धारा 116 के तहत भूमि विभाजन में नोटिस, उद्घोषणा और लेखपाल की रिपोर्ट की डिजिटल व्यवस्था होगी।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल, भूमि अभिलेखों को अधिक सरल और सटीक बनाने के लिए सरलीकृत खतौनी और राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन के मामलों के ऑनलाइन निस्तारण के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को आंबेडकर सभागार में इन तीनों सुविधाओं का शुभारंभ किया।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
ईडब्ल्यूएस पोर्टल के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिक अब प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन को लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर भी ऑनलाइन भेजने और निस्तारित करने की व्यवस्था होगी। आवेदक डिजिटल माध्यम से यह भी देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
इस व्यवस्था से कागजी कार्यवाही कम होगी और नागरिकों को बार-बार तहसील या संबंधित कार्यालय जाने की आवश्यकता भी घटेगी। डिजिटल निगरानी के जरिए निस्तारण में जवाबदेही और समयबद्धता बढ़ाने के साथ प्रक्रिया में पारदर्शिता भी मजबूत होगी।
सरलीकृत खतौनी में छह दशमलव तक क्षेत्रफल
सरलीकृत खतौनी के माध्यम से भूमि अभिलेखों को आम नागरिकों के लिए अधिक स्पष्ट और उपयोगी बनाया गया है। अब खतौनी में जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक दर्ज दिखाई देगा, जिससे क्षेत्रफल की जानकारी अधिक सटीक तरीके से मिल सकेगी।
अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेश और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे भूमि स्वामित्व और पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा।
धारा 116 के भूमि विभाजन के मामले भी ऑनलाइन
राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार अपनी भूमि के विभाजन के लिए वाद कर सकता है। अब इस प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है। इसके जरिए नागरिक भूमि विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल तरीके से संचालित और मॉनिटर की जा सकेगी। संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। वहीं, भूमि की वास्तविक स्थिति देखने के लिए मानचित्र की सुविधा भी दी गई है।
इससे न्यायालय में चल रही प्रक्रिया और मौके की स्थिति के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ने की उम्मीद है।
तकनीक के इस्तेमाल के साथ संवेदनशीलता जरूरी
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिक और उसके भूमि संबंधी अधिकारों से है। ऐसे में तकनीक का मकसद केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
उन्होंने युवा अधिकारियों से संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ काम करने तथा तकनीक का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।
पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों से हुआ संवाद
कार्यक्रम के दौरान पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद भी किया गया। उन्हें राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय राजस्व प्रशासन की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर रोवर तकनीक के जरिए आधुनिक और सटीक भूमि मापन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने राजस्व प्रशासन में तकनीक के उपयोग और क्षेत्र स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा भी की।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.