पढ़ाई के लिए रूस गए पश्चिमी यूपी के 3 युवक लापता, परिजनों ने सेना में भर्ती के दबाव का लगाया आरोप

HIGHLIGHTS
- हिमांशु शर्मा और शक्ति से 30 जुलाई के बाद परिजनों की बातचीत नहीं हो सकी।
- शामली के आशू सैनी ने रूस में भाषा विज्ञान की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था।
- परिजनों ने प्रधानमंत्री से युवकों की सुरक्षित वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई है।
बेहतर कॅरिअर और उच्च शिक्षा की उम्मीद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से रूस गए तीन युवकों के वहां फंसे होने की बात सामने आई है। इनमें मुजफ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र के दो युवक और शामली के हसनपुर लुहारी का एक छात्र शामिल है। परिजनों के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने से तीनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिवारों ने आरोप लगाया है कि युवकों को ड्रग्स का डर दिखाकर रूस की सेना में भर्ती होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ युवकों से जबरन काम कराए जाने का भी आरोप है।
पढ़ाई के लिए रूस गया था हिमांशु, 30 जुलाई के बाद संपर्क बंद
बाढ़ गांव निवासी सुमन के मुताबिक, उनका इकलौता बेटा हिमांशु शर्मा पिछले साल बेहतर कॅरिअर की तलाश में रूस गया था। परिवार की उससे आखिरी बार 30 जुलाई को बातचीत हुई थी। इससे पहले 17 और 22 जुलाई को भी उससे बात हुई थी। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं है।
परिवार लगातार हिमांशु के फोन का इंतजार कर रहा है। रक्षाबंधन के दिन उसकी बहन सारिका भी भाई से बात करने के लिए दिनभर परेशान रही, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका।
शक्ति से भी 30 जुलाई के बाद नहीं हुई बातचीत
चरथावल ब्लॉक के पीपलशाह निवासी विपिन पुंडीर ने बताया कि उनके बेटे शक्ति से आखिरी बार 30 जुलाई को फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद से उसका भी संपर्क नहीं हो पाया है।
परिजनों के अनुसार, शक्ति के साथ बाढ़ गांव के हिमांशु शर्मा और शामली के हसनपुर निवासी राकेश कुमार के बेटे आशू कुमार रूस में एक ही कमरे में रहते थे। अब तीनों के रूस में फंसे होने की बात कही जा रही है।
ड्रग्स का भय दिखाकर सेना में भर्ती कराने का आरोप
किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों युवक स्टडी वीजा पर रूस गए थे। उनके मुताबिक, कई महीने पहले 65 युवकों की सूची सामने आई थी, जबकि अलग-अलग राज्यों के 17 युवकों के शव भी भारत लाए जा चुके हैं।
पूरन सिंह का दावा है कि स्टडी वीजा पर रूस गए कुछ युवकों पर वहां की सेना में भर्ती होने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि युवकों को परिवार से बातचीत करने की अनुमति भी नहीं दी जाती। उन्होंने सहारनपुर के बड़गांव क्षेत्र के एक युवक का उदाहरण देते हुए कहा कि सेना में भर्ती होने से इनकार करने पर उस पर ड्रग्स के फर्जी मुकदमे लगाए गए और उसे सजा करा दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रूस में फंसे युवकों को वापस लाने की मांग
ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि रूस में फंसे युवकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने बताया कि सपा सांसद हरेंद्र मलिक और इमरान मसूद के माध्यम से युवकों के परिजनों को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पास भेजा गया था।
उनका आरोप है कि इसके बावजूद युवकों को वापस लाने के मामले में सरकार का रवैया उदासीन बना हुआ है।
आशू 41 दिन से लापता, 30 जुलाई को हुई थी आखिरी बातचीत
हसनपुर लुहारी, शामली निवासी छात्र आशू सैनी भी 41 दिन से लापता है। वह मॉस्को स्टेट लिंग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान का कोर्स करने रूस गया था। 30 जुलाई को परिजनों से उसकी आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी।
करीब 30 सेकंड की इस बातचीत में आशू ने अपनी बहन अंशुल सैनी से कहा था कि वह ठीक है और अगले दिन फिर बात करेगा। इसके बाद उसका फोन बंद है।
परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बेटे को सकुशल बरामद कराने की गुहार लगाई है। अंशुल के मुताबिक, विश्वविद्यालय से संपर्क करने पर बताया गया कि आशू को सेना के लोग अपने साथ लेकर गए हैं। हालांकि, उसे कौन लेकर गया और किस वजह से ले जाया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों का कहना है कि आशू के साथ मुजफ्फरनगर के दो अन्य छात्र भी लापता बताए जा रहे हैं। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने रूस सरकार और प्रधानमंत्री से आशू की सलामती और सुरक्षित वापसी की मांग की है।
संबंधित एजेंट पर धमकी देने का आरोप
आशू के पिता राकेश कुमार किसान हैं और खेती के जरिए परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे के लापता होने के बाद परिवार काफी परेशान है। परिजनों का आरोप है कि संबंधित एजेंट सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें धमकी दे रहा है, लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है।
शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जानकारी कराकर पीड़ित परिवार की मदद कराई जाएगी।
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