राज्यसभा में यूपी से नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में BJP, स्मृति ईरानी समेत इन नेताओं के नाम चर्चा में

HIGHLIGHTS
- भाजपा-एनडीए यूपी की 10 में से 7 राज्यसभा सीटों पर जीत की स्थिति में
- जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा का नाम भी चर्चा में
- पश्चिमी यूपी के जाट समीकरण को देखते हुए संजीव बालियान का नाम सामने आया
- अर्चना मिश्रा को ब्राह्मण महिला चेहरे के तौर पर दावेदार बताया जा रहा
लखनऊ। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर संगठन में बदलाव के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर भी भाजपा में कुछ नए और चौंकाने वाले चेहरों को मौका दिए जाने की चर्चा है। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा को उच्च सदन भेजे जाने की चर्चा चल रही है। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा-एनडीए उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस में से सात सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की प्रभावी संख्या को देखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान का नाम भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि उन्हें राज्यसभा भेजकर भाजपा जाट वोटों के मामले में रालोद पर अपनी निर्भरता कम कर सकती है। जौनपुर की सीमा द्विवेदी की जगह ब्राह्मण महिला चेहरे के तौर पर प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा को अहम दावेदार माना जा रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और अब राष्ट्रीय महामंत्री बनीं स्मृति ईरानी का उच्च सदन जाना तय माना जा रहा है। वहीं पूर्व मंत्री हुकुम सिंह की बेटी मृगांका का नाम भी चर्चा में है। उनके जरिए पार्टी महिला और गुर्जर, दोनों समीकरणों को साध सकती है।
शाक्य लड़ सकती हैं विधानसभा चुनाव
अर्चना मिश्रा की पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात हो चुकी है। राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी की भी प्रबल दावेदारी बताई जा रही है। राज्यसभा सदस्य रहते गीता शाक्य को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। ऐसे में उनकी जगह पार्टी किसी नए ओबीसी महिला चेहरे को राज्यसभा का टिकट दे सकती है। गीता शाक्य के विधानसभा चुनाव लड़ने की भी संभावना है।
बृजलाल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उनकी जगह दलित चेहरों में युगल किशोर का नाम भी चर्चा में है। हालांकि उनके बेटे के विधायक होने के कारण भाजपा पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और हरदीप पुरी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
यदि दोनों को मंत्रिमंडल विस्तार से बाहर रखा जाता है तो उनकी जगह दूसरे कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना है। भाजपा दो से तीन महिलाओं को अवसर देने का मन बना रही है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को भाजपा ने 2020 में राज्यसभा भेजा था।
चर्चा है कि उनकी दावेदारी को लेकर फैसला गृहमंत्री और प्रधानमंत्री करेंगे। उप राज्यपाल बनने के बाद डा. दिनेश शर्मा राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। उनकी जगह भी किसी नए चेहरे को अवसर मिलेगा।
अगर अरुण सिंह को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलता है तो पूर्व मंत्री सुरेश राणा के लिए भी राज्यसभा जाने का रास्ता खुल सकता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.