विनेश फोगाट का बड़ा खुलासा, कहा- मैं भी बृजभूषण केस की 6 पीड़िताओं में से एक हूं

भारतीय कुश्ती जगत में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ओलंपियन विनेश फोगाट ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली छह महिला पहलवानों में शामिल थीं। पहली बार उन्होंने सार्वजनिक तौर पर खुद को इस मामले की पीड़िता बताया है।
एक वीडियो संदेश जारी करते हुए विनेश ने कहा कि अब तक उन्होंने अपनी पहचान इसलिए सार्वजनिक नहीं की थी, क्योंकि मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने कहा कि पीड़िता की पहचान उजागर न करना गरिमा और सम्मान से जुड़ा विषय है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के कारण उन्हें अब सामने आना पड़ा।
विनेश फोगाट साल 2023 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा रही थीं। उस आंदोलन में उनके साथ बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक समेत कई पहलवान शामिल हुए थे। इस विरोध प्रदर्शन ने देशभर में खेल और राजनीति दोनों स्तरों पर बड़ी चर्चा पैदा की थी।
उन्होंने कहा कि किसी महिला खिलाड़ी के लिए ऐसे माहौल में खेलना बेहद कठिन होता है। जो खिलाड़ी ऐसी परिस्थितियों से गुजरी है, वही उस मानसिक दबाव को समझ सकती है।
गोंडा में ट्रायल पर उठाए सवाल
विनेश ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित होने वाले रैंकिंग टूर्नामेंट और ट्रायल पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगिता ऐसे संस्थान में कराई जा रही है, जो बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों को निष्पक्ष मौका मिलने पर संदेह पैदा होता है।
महासंघ पर प्रभाव का आरोप
विनेश ने यह भी कहा कि भले ही बृजभूषण शरण सिंह किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन महासंघ पर उनका प्रभाव अब भी बना हुआ है। उन्होंने चयन प्रक्रिया, रेफरी नियुक्ति और अंक देने जैसे मामलों पर भी सवाल उठाए।
वापसी से पहले मानसिक चुनौती
पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद लंबे ब्रेक के बाद विनेश फोगाट वापसी की तैयारी कर रही हैं। हालांकि उन्होंने माना कि मौजूदा हालात में पूरी क्षमता के साथ खेलना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि खेल में वापसी से पहले उन्हें मानसिक और प्रशासनिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विनेश फोगाट के इस बयान के बाद खेल मंत्रालय और कुश्ती प्रशासन पर फिर दबाव बढ़ गया है। खिलाड़ियों की सुरक्षा, निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और महासंघ की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
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