सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग, पीएम मोदी के साथ होगी अहम मुलाकात

HIGHLIGHTS
- सात साल बाद भारत पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्रिक्स सम्मेलन में होंगे शामिल।
- पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित।
- करीब छह साल बाद ग्वांगझू-नई दिल्ली उड़ान सेवा 21 सितंबर से फिर शुरू होगी।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गए। वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत पहुंचे हैं। करीब सात साल बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। इससे पहले वह 2019 में चेन्नई के पास मामल्लापुरम में आयोजित अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे।
शी जिनपिंग के साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य और केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक काई ची के अलावा विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी शामिल हैं।
पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि कजान और तियानजिन में हुई बैठकों के बाद यह लगातार तीसरा साल है, जब दोनों नेता आमने-सामने मुलाकात कर रहे हैं।
माओ निंग ने कहा कि चीन दोनों शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के तहत काम करते हुए भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने संवाद को बढ़ाने, सहयोग को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने की बात कही।
चीनी प्रवक्ता ने ब्रिक्स सम्मेलन को उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग सम्मेलन को संबोधित करेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्थिति के साथ-साथ ब्रिक्स के विकास पर चर्चा करेंगे। यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान-अमेरिका टकराव के बीच हो रहे सम्मेलन को लेकर उन्होंने कहा कि चीन विवादों के राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत और वैश्विक शांति की पैरवी करता है।
सीमा विवाद के बाद रिश्ते सामान्य करने की कोशिश
2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर सैन्य तनाव पैदा होने के बाद से भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक ठहराव बना रहा। ऐसे में शी जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस यात्रा से पहले 25 अगस्त को बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की वार्ता हुई थी। इस बैठक में सीमा प्रबंधन और सीमांकन के मुद्दे पर तेजी से आगे बढ़ने को लेकर कई सहमतियां बनी थीं।
चीन से भारत के बीच उड़ान सेवा भी होगी बहाल
शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चाइना सदर्न एयरलाइंस ने शनिवार को एक अहम घोषणा की। एयरलाइन ने बताया कि 21 सितंबर से ग्वांगझू-नई दिल्ली मार्ग पर नियमित यात्री उड़ान सेवा दोबारा शुरू की जाएगी।
करीब छह साल से बंद इस उड़ान सेवा की बहाली को दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेवा शुरू होने के बाद एयरलाइन दक्षिण एशिया में अपने आठ राउंड-ट्रिप मार्गों पर हर सप्ताह 100 से अधिक उड़ानों का संचालन करेगी। इससे भारत और चीन के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है।
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