वाराणसी में ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आगाज, सुखोई-राफेल के करतब देख रोमांचित हुए दर्शक

HIGHLIGHTS
- नमो घाट, राजघाट और आसपास के गंगा घाटों पर सुबह से ही दर्शकों की भारी भीड़ जुटी।
- कमांडो ने हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे जलयान पर उतरकर विशेष ऑपरेशन का प्रदर्शन किया।
- सूर्यकिरण और सारंग टीमों ने हवाई करतब दिखाए, जबकि विभिन्न विमानों ने तिरंगे के रंगों से आसमान को सजाया।
वाराणसी। काशी में ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आधारित बहुप्रतीक्षित एयर शो शुरू हो गया है। भारतीय वायु सेना के इस हवाई प्रदर्शन को देखने के लिए सुबह से ही नमो घाट, राजघाट और गंगा के आसपास के अन्य घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। युद्धक विमानों की कलाबाजियां देखने के लिए दर्शक उत्साहित नजर आए। सुबह 10 बजे तक शहर में जाम की स्थिति बनने लगी, जबकि साढ़े 10 बजे तक नमो घाट के आसपास के प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ दिखाई देने लगी।
दोपहर 12:30 बजे हेलीकॉप्टर से गंगा में मौजूद जलयान पर कमांडो के रस्सी के सहारे उतरने का प्रदर्शन किया गया। कमांडो की दक्षता देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। जलयान पर उतरने के बाद जवानों ने अपनी पोजीशन संभाली तो देशभक्ति के गीतों के बीच तालियों की गूंज सुनाई दी।
देशभक्ति के गीतों पर झूमते दर्शकों के बीच विमानों की गर्जना और पौराणिक थीम पर आधारित फॉर्मेशन ने काशी के आसमान को खास रंग दे दिया। हेलीकॉप्टरों की कतार राजघाट पुल के ऊपर से गुजरी। वापसी के दौरान इसी कतार से तिरंगे के रंगों की छटा दिखाई गई, जिससे दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया। हवाई प्रदर्शन में सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने भी अपने उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया और आसमान को तिरंगे के रंगों से सजा दिया।
दोपहर 12 बजे के बाद सुखोई विमानों के करतबों ने दर्शकों के उत्साह को चरम पर पहुंचा दिया। इससे पहले तीन सूर्यकिरण विमानों ने विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार के विक फॉर्मेशन में उड़ान भरकर विश्वनाथ फॉर्मेशन बनाया। विमानों ने गंगा के ऊपर आसमान को भारतीय तिरंगे के रंगों से सजाया तो दर्शकों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।
इसके बाद राफेल ने अपनी गति और करतबों से शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन किया। विमान ने तेजी से उड़ान भरते हुए दिशा बदली और 200 किलोमीटर प्रति घंटे की न्यूनतम गति पर भी करतब दिखाए। राफेल ने गंगा के ऊपर कई चक्कर लगाए और अलग-अलग दिशाओं में ऊपर-नीचे उड़ान भरी। इस दौरान विमान ने उल्टी उड़ान भी भरी और 180 डिग्री के कोण पर जाकर अचानक अपनी दिशा बदल दी। काशी फॉर्मेशन के बाद केदार फॉर्मेशन के तहत कम ऊंचाई पर सटीक एरोबेटिक करतब दिखाए गए।
सबसे पहले भारतीय वायु सेना और भारतीय थल सेना के तीन एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टरों ने वरुणा फॉर्मेशन बनाया। इसके तहत जवानों ने रस्सी के सहारे नीचे उतरने की प्रक्रिया यानी स्लिदरिंग ऑपरेशन का प्रदर्शन किया।
एयर शो का मुख्य कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे के बाद शुरू हुआ। इससे पहले ही लोगों की निगाहें आसमान पर टिक गई थीं। सुरक्षा व्यवस्था को आधी रात के बाद से ही कड़ा कर दिया गया था। आयोजन की थीम ‘विंग्स ओवर गंगा’ रखी गई है।
मालवीय पुल बंद, दूसरे रास्तों पर बढ़ा यातायात का दबाव
भारतीय वायु सेना के एयर शो के मद्देनजर मालवीय पुल पर सुबह 9 बजे से आवागमन रोक दिया गया। पुल बंद होने से इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, वाहनों का दबाव दूसरे रास्तों पर बढ़ने से शहर के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ।
मालवीय पुल शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। इस पर आवाजाही बंद होने के कारण रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों और वाहन चालकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। बदले हुए यातायात मार्गों के कारण लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। दूसरी ओर, वैकल्पिक रास्तों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात व्यवस्था संभालना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एयर शो के दौरान सुरक्षा और आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं के चलते पुल पर आवागमन बंद रखा गया है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मालवीय पुल पर आवाजाही फिर शुरू की जाएगी। अगले दो दिनों में होने वाले एयर शो के दौरान भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले अपने रास्तों की जानकारी लेने और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की जरूरत है।
पहली बार काशी में पौराणिक थीम पर एयर शो
काशी में पहली बार युद्धक विमान आसमान में अपनी क्षमता और कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आयोजन की खास बात यह है कि इसके फॉर्मेशन पौराणिक थीम पर आधारित हैं। इनमें केदार, सारंग, ओंकार, गंगा, रुद्र, भागीरथी, त्रिदेव, अलकनंदा, भैरव, कैलाश, त्रिलोचन और दशाश्वमेध जैसे नाम शामिल हैं। भारतीय वायु सेना भी पहली बार पौराणिक थीम पर आधारित हवाई प्रदर्शन कर रही है।
भारतीय वायु सेना के अनुसार, राष्ट्र की सेवा में 94 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वाराणसी के नमो घाट पर भारतीय वायु सेना हवाई प्रदर्शन 2026 आयोजित किया जा रहा है। गंगा के ऊपर होने वाला यह प्रदर्शन वायु एवं अंतरिक्ष शक्ति को प्रदर्शित करने के साथ युवाओं को प्रेरित करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति वायु सेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा।
हवाई प्रदर्शन के लिए कुल 25 फॉर्मेशन की योजना बनाई गई है। भारतीय वायु सेना के विभिन्न प्रकार के विमानों और हेलीकॉप्टरों की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए इन फॉर्मेशन की सावधानीपूर्वक तैयारी की गई है। समन्वय और सटीकता के साथ किए जाने वाले हवाई युद्धाभ्यासों के माध्यम से विमानों की परिचालन क्षमताओं और वायु योद्धाओं की पेशेवर दक्षता दिखाई जाएगी।
इस वर्ष के फ्लाईपास्ट में हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान और लड़ाकू विमान शामिल हैं। हेलीकॉप्टरों में एलसीएच, चिनूक, एएलएच मार्क III, एएलएच मार्क IV, अपाचे, चेतक, कामोव-31 और एमआई-17 वी5 शामिल हैं। परिवहन और अन्य सहायक विमानों में सी-295, सी-17, सी-130, एईडब्ल्यूएंडसी, आईएल-78, एएन-32 और पी-8आई शामिल हैं।
लड़ाकू विमानों में सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, राफेल, एलसीए, मिग-29 और जगुआर शामिल होंगे। हार्वर्ड विमान के साथ सूर्यकिरण और सारंग प्रदर्शन टीमें भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। भाग लेने वाले विमानों में भारतीय थल सेना के दो एएलएच हेलीकॉप्टर और भारतीय नौसेना का एक पी-8आई तथा एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
गंगा के ऊपर होने वाला यह हवाई प्रदर्शन आम जनता के लिए एक दुर्लभ और खास दृश्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसकी थीम ‘Wings over Ganges’ रखी गई है। हवाई प्रदर्शन में कुल 100 विमान भाग लेंगे। इनमें 52 लड़ाकू विमान, 15 परिवहन विमान, 32 हेलीकॉप्टर और एक ऐतिहासिक विमान शामिल हैं।
भारतीय वायु सेना के गरुड़ विशेष बल भी इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं। विमान देशभर के 12 वायु अड्डों से उड़ान भरेंगे, जिनमें चेन्नई के पास स्थित नौसैनिक अड्डा अरक्कोणम भी शामिल है। यह वायु एवं अंतरिक्ष शक्ति की व्यापक उपस्थिति और रणनीतिक पहुंच को दर्शाता है।
एयर शो के प्रमुख फॉर्मेशन
काशी: तीन सूर्यकिरण विमान विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार के विक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे और गंगा के ऊपर आसमान को भारतीय तिरंगे के रंगों से सजाएंगे।
वरुणा: भारतीय वायु सेना और भारतीय थल सेना के तीन एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टर इस फॉर्मेशन में शामिल होंगे। इसके तहत रस्सी के सहारे जवानों को नीचे उतारने यानी स्लिदरिंग ऑपरेशन का प्रदर्शन किया जाएगा।
केदार: काशी फॉर्मेशन के बाद एक राफेल विमान कम ऊंचाई पर सटीक एरोबेटिक करतब दिखाएगा।
हनुमान और सारनाथ: ‘हनुमान’ कॉलसाइन के तहत एक सुखोई-30 एमकेआई विमान कम ऊंचाई पर एरोबेटिक प्रदर्शन करेगा। इसके बाद ‘सारनाथ’ फॉर्मेशन में एक हार्वर्ड विमान सटीक हवाई करतब दिखाएगा।
सारंग: सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम अपने उड़ान कौशल का प्रदर्शन करेगी।
ओंकार और गंगा: ‘ओंकार’ फॉर्मेशन में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर विक फॉर्मेशन में राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायु सेना का ध्वज लेकर उड़ान भरेंगे। इसके बाद ‘गंगा’ फॉर्मेशन में तीन चेतक हेलीकॉप्टर पुष्पवर्षा करेंगे।
रुद्र: एक सुखोई-30 एमकेआई विमान मुख्य मंच के ऊपर से तेज गति से गुजरेगा।
भागीरथी: दो स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों (एलसीएच) और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का फॉर्मेशन डायमंड आकार में उड़ान भरेगा।
त्रिदेव: इस फॉर्मेशन में सबसे आगे भारतीय नौसेना का एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर होगा। इसके साथ भारतीय वायु सेना का एक एएलएच मार्क III और भारतीय थल सेना का एक एएलएच मार्क III हेलीकॉप्टर विक्ट्री फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। यह फॉर्मेशन तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन, समन्वय और साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को प्रदर्शित करेगा।
अलकनंदा: दो चिनूक और दो एएलएच मार्क IV हेलीकॉप्टर उल्टे विक्ट्री फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इसमें एक चिनूक पीछे की स्थिति में होगा।
भैरव: एक सी-295 और दो डोर्नियर विमान विक्ट्री फॉर्मेशन में मुख्य मंच के सामने से उड़ान भरेंगे।
कैलाश: एक सी-130 और दो एएन-32 विमान विक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे।
त्रिलोचन: एक एईडब्ल्यूएंडसी विमान दो मिग-29 लड़ाकू विमानों के साथ विक फॉर्मेशन में उड़ान भरेगा।
नटराज: भारतीय नौसेना का एक पी-8आई समुद्री निगरानी विमान दो मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेगा। यह फॉर्मेशन समुद्री निगरानी और हवाई युद्ध क्षमताओं के समन्वय को प्रदर्शित करेगा।
महादेव: हवा में ईंधन भरने वाला एक आईएल-78 विमान तीन मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेगा।
विश्वनाथ, पशुपति और नीलकंठ: ‘विश्वनाथ’ फॉर्मेशन में तीन सुखोई-30 एमकेआई विमान विक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इसके बाद ‘पशुपति’ फॉर्मेशन में चार जगुआर विमान डायमंड फॉर्मेशन बनाएंगे। फिर तीन राफेल विमानों का ‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन होगा।
प्रचंड: सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए और मिग-29 सहित छह लड़ाकू विमान तीर के अग्रभाग जैसे एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे।
प्रचंड फॉर्मेशन: यह भारतीय वायु सेना की युद्ध क्षमता को समर्पित है, जिसका प्रदर्शन हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था। अग्रिम पंक्ति के ये लड़ाकू विमान वायु सेना की तत्परता, सटीक प्रहार क्षमता और राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निर्णायक वायु शक्ति के इस्तेमाल की क्षमता को प्रदर्शित करेंगे।
अस्सी: स्वदेशी एलसीए तेजस विमान ‘अस्सी’ कॉलसाइन के साथ प्रदर्शन का आकर्षण बनेगा। यह स्वदेशी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की क्षमता, उन्नत उड़ान कौशल और लड़ाकू विमानन में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करेगा। विमान कम ऊंचाई पर एरोबेटिक करतब दिखाएगा।
दशाश्व: इस फॉर्मेशन में एक सी-17 ग्लोबमास्टर विमान नौ सूर्यकिरण हॉक विमानों का नेतृत्व करते हुए मुख्य मंच के ऊपर से फ्लाईपास्ट करेगा। इसके बाद भारत की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम आसमान में अपना प्रदर्शन प्रस्तुत करेगी।
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