हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार के बजट प्रावधानों और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इन फैसलों के चलते राज्य को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ेगा, जो प्रदेश की आर्थिक सेहत के लिए बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार यह कोई अल्पकालिक घाटा नहीं, बल्कि हिमाचल की वित्तीय स्थिरता पर पड़ने वाला दीर्घकालिक असर है।

अग्निहोत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद से ही पहाड़ी राज्यों की आय संरचना कमजोर हुई है। पहले जीएसटी क्षतिपूर्ति खत्म हुई और अब राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को भी बंद कर दिया गया, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति और दबाव में आ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले प्रदेश के लिए यह फैसला किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने बताया कि राज्य का कुल वार्षिक बजट लगभग 58 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें से बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और अनिवार्य खर्चों में चला जाता है। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली सहायता में कटौती का सीधा असर विकास योजनाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों पर पड़ेगा।

उप मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल को करीब 38 हजार करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान के रूप में मिले थे और मौजूदा हालात में इस राशि के बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन इसके उलट इस सहायता को ही समाप्त कर दिया गया, जिससे राज्य के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन के समय ही यह स्वीकार किया गया था कि इसकी भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित राजस्व स्रोतों के कारण उसे केंद्र से विशेष आर्थिक सहयोग की आवश्यकता रहेगी। वर्ष 1952 से चली आ रही यह व्यवस्था संविधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा रही है और RDG उसी परंपरा का औपचारिक स्वरूप था।

अग्निहोत्री ने इस फैसले को संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि जहां बड़े राज्यों के पास आय के पर्याप्त स्रोत होते हैं, वहीं पहाड़ी और सीमांत राज्यों के लिए केंद्रीय सहायता जीवनरेखा की तरह होती है। RDG खत्म होने से ऐसे राज्यों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने भाजपा के सातों सांसदों और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से भी सवाल किया कि वे साफ बताएं कि वे इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ खड़े हैं या हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ।