लखीमपुर खीरी में विजिलेंस टीम ने लुधौरी वन रेंज के रेंजर गजेंद्र बहादुर सिंह यादव और वन दरोगा राजेंद्र वर्मा को शुक्रवार को रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोप है कि दोनों ने शीशम के पेड़ों के कटान परमिट के लिए किसान से 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
पृथ्वीपुरवा के किसान पूरन ने खेत में लगे तीन पेड़ों के लिए कटान परमिट आवेदन किया था। रेंजर ने परमिट के नाम पर 18 हजार और पेड़ निकालने के लिए अतिरिक्त 30 हजार रुपये की मांग की। वन दरोगा ने रेंजर से बात कर राशि 40 हजार रुपये तय कर ली और किसान को कार्यालय बुलाया। किसान ने तुरंत विजिलेंस टीम को सूचना दी। तय समय पर जब पूरन पैसे देने पहुंचा, विजिलेंस टीम ने दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों के खिलाफ लखनऊ के उप्र सतर्कता अधिष्ठान थाना में मामला दर्ज कराया गया है।
इस घटना से वन विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह विभाग में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है, लेकिन जिले के अन्य सरकारी विभागों में पहले भी कई बड़े भ्रष्टाचार के मामले पकड़े जा चुके हैं।
पिछले एक साल में जिले में तीन बड़े रिश्वतखोरी के मामले उजागर हुए हैं। 23 अगस्त 2025 को पीसीएफ के दो बाबुओं को ठेकेदार से 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। इसके अलावा 22 मार्च 2025 को ब्लॉक कुंभी में तैनात सहायक मनरेगा अधिकारी मधुर गुप्ता और 14 नवंबर 2024 को सिंगाही के लेखपाल संजय तिवारी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था।
करीब तीन साल पहले, अगस्त 2022 में पलिया मंडी समिति के प्रभारी सचिव और 2019 में पलिया के एक लेखपाल भी रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं।