बुढ़ाना क्षेत्र के कुरथल गांव में चार साल पहले किशोर आशीष काला की गला दबाकर हत्या के मामले में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मृतक का विरोध था कि उसकी मां मुनेश और गांव के ही प्रेमी सतेंद्र उर्फ नाधा के बीच संबंधों को स्वीकार नहीं करता था। जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने यह फैसला सुनाया।

घटना की पृष्ठभूमि
सात अगस्त 2022 को आशीष घर से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। अगले दिन उसका शव ट्यूबवेल पर पड़ा मिला। प्रारंभ में मां ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मुनेश और सतेंद्र को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार सतेंद्र अक्सर मुनेश के घर आता-जाता था, जबकि आशीष इसके विरोध में था। हत्या की योजना दोनों ने मिलकर बनाई और किशोर को जंगल में ले जाकर उसकी गला दबा कर हत्या कर दी। शव को हौज में फेंक दिया गया।

अदालत में सुनवाई
अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य पेश कर दोनों आरोपियों पर हत्या का दोष सिद्ध किया। शुक्रवार को जिला जज ने उन्हें दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया।

पक्षों के तर्क
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि मुनेश विधवा हैं और सतेंद्र की पत्नी का निधन हो चुका है, दोनों आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वहीं, अभियोजन ने मामले को गंभीर बताते हुए फांसी की सजा की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद ही आजीवन कारावास का आदेश दिया।