FCRA संशोधन से पहले गृह मंत्रालय ने गिनाए नियम, कहा- पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

HIGHLIGHTS
- MHA ने FCRA संशोधन को विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ा।
- मंत्रालय ने कहा, विदेशी फंड नियंत्रण के लिए कई देशों में सख्त कानून मौजूद हैं।
- प्रस्तावित बदलावों में NGOs की संपत्ति और विदेशी नागरिकों की भूमिका से जुड़े नए प्रावधान शामिल हैं।
नई दिल्ली। संसद में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (FCRA) पर चर्चा से पहले केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार को कहा कि विदेशी फंडिंग और उसके प्रभाव को नियंत्रित करना केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे प्रमुख लोकतांत्रिक देशों ने भी पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कानूनों को और मजबूत किया है।
गृह मंत्रालय ने जारी जानकारी में कहा कि बिना किसी नियमन के विदेशी धन लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। मंत्रालय ने इसी वैश्विक चिंता का हवाला देते हुए विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने की जरूरत बताई।
MHA ने अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) का उदाहरण देते हुए बताया कि राजनीतिक गतिविधियों या लॉबिंग में विदेशी हितों की ओर से काम करने वाले लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन और जानकारी देना अनिवार्य है। इसके अलावा, ब्रिटेन की फॉरेन इन्फ्लुएंस रजिस्ट्रेशन स्कीम 2025 का भी जिक्र किया गया, जिसमें विदेशी ताकतों के साथ राजनीतिक प्रभाव से जुड़े समझौतों के लिए दो साल तक की जेल का प्रावधान है।
मंत्रालय ने बताया कि यूरोपीय संघ ने भी गैर-ईयू सरकारों की ओर से लॉबिंग गतिविधियों के लिए सदस्य देशों में पारदर्शिता रजिस्टर का प्रस्ताव रखा है।
FCRA विदेशी फंड लेने पर रोक नहीं लगाता: MHA
गृह मंत्रालय ने उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा जाता है कि FCRA गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशी फंड लेने से रोकता है। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2024-25 में 16,200 संस्थाएं सक्रिय रूप से पंजीकृत थीं और उन्हें विदेशी योगदान के रूप में 22,963 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
MHA ने कहा कि FCRA किसी धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाता। धर्म आधारित कल्याणकारी गतिविधियां भी विदेशी फंडिंग के लिए पात्र बनी हुई हैं।
हटाए गए NGOs की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के तहत सरकार उन NGOs की संपत्ति जब्त कर सकती है, जिनका पंजीकरण सूची से हटा दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि विदेशी फंड से बनाई गई संपत्ति का प्रबंधन तय प्राधिकरण तभी करेगा, जब किसी संस्था का FCRA पंजीकरण कानूनी रूप से समाप्त हो जाएगा।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पूजा स्थलों का धार्मिक स्वरूप बरकरार रहेगा और संबंधित संस्थाओं को अपील करने का अधिकार भी दिया जाएगा।
इसके अलावा, पंजीकृत संस्थाओं में विदेशी नागरिकों को महत्वपूर्ण पदों से दूर रखने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि विदेशी योगदान का प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथों में रहे, जिनका भारत से सत्यापित संबंध हो।
FCRA एक केंद्रीय कानून है: गृह मंत्रालय
केंद्रीय कानून के तहत राज्य स्तर पर FCRA जांच के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी होने के मुद्दे पर MHA ने कहा कि FCRA एक केंद्रीय कानून है।
मंत्रालय ने कहा कि FCRA का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन भारत में पंजीकृत, जवाबदेह और पारदर्शी माध्यम से आए। साथ ही इससे हजारों संस्थाओं को अपने कार्यों को सही तरीके से और प्रभावी ढंग से करने में मदद मिलती है।
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